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Jabalpur : धीरेन्द्र शास्त्री के विरुद्ध आपत्तिजनक टिप्पणी वाले मामले में फेसबुक की अपील खारिज

जबलपुर : मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के विरुद्ध आपत्तिजनक टिप्पणी वाले मामले में मेटा (फेसबुक) के द्वारा प्रस्तुत की गई याचिका डब्ल्यू. ए. नं. 209/2024 को खारिज कर दिया। इस मामले में फेसबुक द्वारा अपनी अपील वापस लेने का आवेदन किया गया था। मंगलवार को न्यायालय ने उक्त प्रार्थना को स्वीकार करते हुए अपील को खारिज किया।

जानकारी के अनुसार, विगत समय फेसबुक ट्विटर और यू-ट्यूब के द्वारा बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर संत आचार्य धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री के विरुद्ध अनर्गल मटेरियल अपने प्लेटफॉर्म से चलाया जा रहा था। जिसके विरुद्ध रंजीत सिंह पटेल के द्वारा न्यायालय से यह प्रार्थना की थी कि इस प्रकार के अनर्गल एवं मिथ्याजनक प्रचार को रोका जाए। जिस पर संज्ञान लेते हुए उच्च न्यायालय के एकल पीठ के द्वारा 4 दिसंबर 2023 को फेसबुक, ट्विटर और यू-ट्यूब इत्यादि सभी पोर्टलों को आदेशित किया गया कि वे आचार्य धीरेन्द्र शास्त्री के विरुद्ध किसी भी प्रकार का आपत्तिजनक मटेरियल नहीं चलाएं। इसके बाद फेसबुक के द्वारा यह मेटा (फेसबुक) के द्वारा उच्च न्यायालय के समक्ष यह तर्क दिया गया कि फेसबुक एक इलेक्ट्रॉनिक डिजिटल पोर्टल है। जिसका किसी भी प्रकार का नियंत्रण उसके कंटेंट को लेकर नहीं है,अतः वह अक्षम है कि किसी अन्य व्यक्ति के द्वारा यदि कोई मटेरियल पोस्ट किया जाता है तो उसकी जानकारी लें या उसे रोक सकें। तर्क दिया गया कि रंजीत सिंह पटेल को किसी भी प्रकार का अधिकार नहीं है कि वह किसी अन्य व्यक्ति के विषय में न्यायालय के समक्ष याचिका प्रस्तुत करे। फेसबुक के द्वारा यह भी तर्क दिया गया कि नियमानुसार फेसबुक की कोई जिम्मेदारी नहीं बनती है।

रंजीत सिंह पटेल के अधिवक्ता पंकज दुबे के द्वारा न्यायालय के समक्ष यह तर्क रखा गया कि सन 2022 में जो सुप्रीम कोर्ट के समक्ष फेसबुक का एक मुकदमा चला था। जिसमें उच्चतम न्यायालय द्वारा पेरा नं. 155 एवं 156 में यह निर्धारित किया है कि फेसबुक इत्यादि ऐसे प्लेटफॉर्म है जो कि आने वाले समय में बहुत ही संवेदनशील है। यह नहीं माना जा सकता कि इनका किसी भी प्रकार का नियंत्रण नहीं हो, इनसे यह अपेक्षा है कि वे जिस भी प्रकार का मटेरियल डाला गया है। उसकी जानकारी रखे और आपत्ति होने पर उसे विलोपित करें एवं ऐसे मटेरियल को प्रसारित एवं प्रचारित ना करें। फेसबुक अपने तर्कों से न्यायालय को प्रभावित नहीं कर सका। ऐसी स्थिति में मेटा (फेसबुक) के द्वारा न्यायालय के समक्ष प्रार्थना की गई कि वे अपनी अपील को वापस लेना चाहते है। न्यायालय ने उक्त प्रार्थना को स्वीकार करते हुए अपील को खारिज किया।

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