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Dhamtari : वार्षिक जलवायु महोत्सव में बिखरी सांस्कृतिक छटा, वन संरक्षण पर हुई चर्चा

धमतरी : अज़ीम प्रेमजी फ़ाउंडेशन, शंकरदाह- धमतरी में 29 जनवरी से सात दिवसीय वार्षिक जलवायु महोत्सव शुरू हुआ। इस कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण को लेकर विभिन्न कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। प्रथम दिवस सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ कार्यक्रम शुरू हुआ।

वार्षिक जलवायु महोत्सव फारेस्ट्स आफ़ लाइफ -यानि जंगलों का महोत्सव में कई कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। महोत्सव को आर्ट इंस्टालेशन, युवाओं द्वारा खींची गई जंगल की तस्वीरों, संगीत, फिल्मों, कलाकृतियों, इंटरैक्टिव कार्यशालाओं के अलावा कई अन्य माध्यमों से जीवंत बनाया गया है। अज़ीम प्रेमजी फ़ाउंडेशन के शंकरदाह, धमतरी परिसर में आयोजित होने वाला यह महोत्सव चार फरवरी तक लोगों के लिए खुला रहेगा। महोत्सव का उदघाटन विशिष्ठ शिक्षाविद और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव शरद चन्द्र बेहार ने किया। उदघाटन समारोह में उन्होंने कहा कि जो जलवायु परिवर्तन 20 साल बाद होना चाहिए वह आज हो रहा है। उन्होंने छत्तीसगढ़ में बचपन में अपने गांव के पास के जंगल होने की जानकारी दी तो बच्चों ने उनसे जंगल से संबंधित कई सवाल किए और उन्होंने सभी का जवाब दिया।

उत्सव के उद्देश्य के बारे में अज़ीम प्रेमजी विश्वविद्यालय के फेकल्टी कुनाल शर्मा ने बताया कि पर्यावरण संरक्षण को लेकर यह कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। उत्सव के पहले के दिन लगभग 300 बच्चे और 100 से ज्यादा शिक्षक शामिल हुए। लगातार कई इंटरैक्टिव कार्यशालाएं, फिल्म प्रदर्शन, लोक गीत, लोककथाओं की प्रस्तुति, पर्यावरणविद् चंडी प्रसाद भट्ट की एक वार्ता और फोटो प्रदर्शनी आयोजित किए जाएंगे। 29 जनवरी को बस्तर से आए मुरिया समुदाय के कलाकारों ने करसाड़ नृत्य का प्रदर्शन किया। वहीं कोंडागांव से आए साथी संगठन की ओर से बस्तर के कलाकृतियों का प्रदर्शन किया गया। वाहों संगठन के प्रमुख भूपेश तिवारी और कमार समुदाय के एक मुखिया मयाराम नेताम ने बच्चों से संवाद किया।

महोत्सव की एक गतिविधि के रूप में, अज़ीम प्रेमजी विश्वविद्यालय ने स्कूल, कालेज के विद्यार्थियों के एक बड़े समूह का चयन किया गया था। उन्होंने देश भर में 110 जंगलों की यात्रा की थीं। विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत इन कथाओं में उनके अनुभवों, मानव-पशु संघर्ष की चुनौतियों और प्रकृति के साथ देशज समुदायों के गहरे जुड़ाव को एक साथ संजोया गया है। उन्होंने वन्य जीव पुनर्वास के सफल उदाहरणों और संरक्षण की विस्तृत, प्रेरणादायक कहानियों को भी दर्ज किया है।

सात दिन चलने वाले इस महोत्सव में प्रदर्शित सामग्री हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में है। इसे देखना एक गहन और समृद्ध करने वाला अनुभव है। यह महोत्सव शहरी लोगों और देशज समुदायों के विभिन्न दृष्टिकोणों को सामने रखेगा। साथ ही यह विद्यार्थियों को वनों की अवधारणा से परिचित कराएगा।

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