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Dehradun : नवीनीकरण ऊर्जा का उपयुक्त स्रोत है बायो एथेनॉल

देहरादून : ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी में आयोजित फैकेल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम में बायो एथेनॉल के उत्पादन में सिंथेटिक बायोटेक्नोलॉजी के बेहतरीन उपयोगों पर जानकारी साझा की गई।

कार्यक्रम का आयोजन अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद के अटल फैकेल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत किया गया। ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी की डॉ. शिवांगी चमोली ने कहा कि लिग्नोसैल्युलोसिक बायोमास से उत्पादित बायो एथेनॉल एक उपयुक्त नवीनीकरण ऊर्जा का स्रोत है। लिग्नोसैल्युलोसिक सामग्री की अनुकूलन प्रक्रिया में एंजाइम्स का इस्तेमाल करके इसके उत्पादन को बढ़ाया जा सकता है जिसके फलस्वरुप लागत कम होने से व्यवसायीकारण में इजाफा होगा।

कई दिनों तक चले इस कार्यक्रम में देशभर के शोधकर्ताओं, वैज्ञानिकों और शिक्षक- शिक्षिकाओं ने भाग लिया। कैडिला फार्मास्युटिकल्स के राज प्रकाश व्यास, एम्स नई दिल्ली के प्रो. टी. पी. सिंह, आईआईटी दिल्ली की प्रो. सरोज मिश्रा, आईआईटी रुड़की के डॉ. नवीन नवानी, जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी के डॉ. विकास यादव, आईआईटी दिल्ली के डॉ. दीपक जोशी, यूपीईएस देहरादून के डॉ. पीयूष कुमार और जेआईआईटी नोएडा के डॉ. कृष्ण सुंदरी, एन आई टी कालीकट की डॉ. दीप्थी बेंडी ने भी जीव विज्ञान की विभिन्न शाखों में सिंथेटिक बायोटेक्नोलॉजी के उपयोगों पर जानकारी दी।

कार्यक्रम का आयोजन ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी के डिपार्मेंट आफ बायोटेक्नोलॉजी ने किया। कार्यक्रम में डॉ. पल्लवी सिंह, डॉ. कुमुद पंत और डॉ. प्रभाकर सेमवाल भी मौजूद रहे।

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