
भिवंडी : लोक अदालत में फैसला आपसी समझ पर आधारित रहता है, इसलिए लोक अदालत का फैसला दोनों पक्षों को संतुष्टि देता है और चूंकि फैसला आपसी सहमति से होता है, इसलिए दोनों पक्षों के बीच नफरत और कड़वाहट में कोई वृद्धि नहीं होती है। भिवंडी कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश शहजाद परवेज ने भिवंडी कोर्ट में आयोजित नेशनल लोक अदालत के दौरान मार्गदर्शन करते हुए उपरोक्त राय व्यक्त की। भिवंडी तालुका विधि सेवा समिति और भिवंडी वकील संघ ने न्यायालय में लोक अदालत का आयोजन किया।
लोक अदालत में मामले को त्वरित निर्णय मिलता है। साक्ष्य के साथ छेड़छाड़, जिरह, औचित्य के मुद्दों से बचा जाता है। लोक अदालत के निर्णयों के खिलाफ कोई अपील नहीं होती है। एक ही निर्णय मुकदमेबाजी से स्थायी राहत प्रदान करता है । ऐसी स्पष्ट राय देते हुए न्यायाधीश ए.के. शर्मा ने कहा कि बैंक अधिकारियों को कुछ रियायतें देकर उधारकर्ताओं की मदद करने के लिए काम करना चाहिए। इस अवसर पर न्यायाधीश ए.एच.सय्यद , एल .सी.वाडीकर, एस.एस.काले, बी.ए.अग्रवाल, एच.वाय .पठाण, भिंवडी वकील संघटना के माजी अध्यक्ष ऍड. नारायन अय्यर, सचिव ऍड.जितेद्र पाटील, अंकीत कडू, कल्पेश ठाकुर,मनोज गोराडकर, रोहीदास पाटील, कल्पेश पाटील, सुयश सोनावने, जमीर पठाण , न्यायिक अधिकारी, अदालत के कर्मचारी, पक्ष अन्य लोगों के साथ उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन भिवंडी वकील संघटना के सचिव ऍड जितेंद्र पाटिल ने किया।


