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रोजाना एक कविता : आज पढ़ें अरुण लाल की कविता वेलेंटाइन डे के बाद

A poem a day

सुनो मैं तुम्हें प्रेम करता हूँ
इसलिये नहीं कि तुम्हें प्रेम के काबिल पाता हूं
बल्कि इसलिए कि तुम्हें सोचने भर से
मेरा मन प्रेम से भर जाता है
मैं तुम्हें देखना चाहता हूं
इसलिए नहीं कि तुम देखे जाने के काबिल हो
बल्कि इसलिए कि तुम्हें देखने से आनंद से भर जाता हूं
सुनो सखी मैं नहीं जानता क्या है प्रेम
और क्या मैं इस काबिल हूं
कि तुम्हें प्रेम कर सकूं
पर यकीन मानो तुम्हें याद करके बढ़ जाती है धड़कन
इसीलिए मुझे लगता है
मैं तुम्हें प्रेम करता हूं

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