Mumbai : कोर्ट ने अभिषेक घोसालकर केस में नार्को/पॉलीग्राफ जांच की दी अनुमति

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Mumbai: Court grants permission for narco/polygraph test in Abhishek Ghosalkar case

मुंबई : (Mumbai) महाराष्ट्र के मुंबई के पूर्व पार्षद अभिषेक घोसालकर हत्या मामले के दो संदिग्ध आरोपितों के पॉलीग्राफ टेस्ट को मुंबई सत्र न्यायालय (Mumbai Sessions Court) ने गुरुवार को मंजूरी दे दी और एक आरोपित अमरेंद्र मिश्रा के पॉलीग्राफ टेस्ट की मांग खारिज कर दी है। इसका कारण अमरेंद्र मिश्रा ने पॉलीग्राफ टेस्ट को सहमति देने से इनकार कर दिया था।

मामले की सुनवाई सत्र न्यायालय के विशेष सीबीआई अदालत के जज अजीत यादव के सामने हुई। सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (Central Bureau of Investigation) (CBI) ने अदालत में एक अर्जी दी थी, जिसमें कहा गया था कि अमरेंद्र मिश्रा, मेहुल पारेख और रयान गोर के पास घोसालकर मर्डर केस के बारे में अहम जानकारी हो सकती है। इसलिए, मामले में सच्चाई सामने लाने के लिए इन तीनों के पॉलीग्राफ टेस्ट की इजाज़त देने की रिक्वेस्ट की गई थी।

सुनवाई के दौरान मेहुल पारेख और रयान गोर ने अपनी मर्जी से पॉलीग्राफ़ टेस्ट के लिए सहमति दी। उन्होंने अदालत को बताया कि उन्हें टेस्ट के नेचर, इसके संभावित नतीजों और कानूनी पहलुओं के बारे में पूरी जानकारी है। इसके बाद अदालत ने उनके पॉलीग्राफ़ टेस्ट को मंज़ूरी दे दी

लेकिन, आरोपित अमरेंद्र मिश्रा ने पॉलीग्राफ़ टेस्ट करवाने से साफ़ मना कर दिया। भारतीय कानून के अनुसार, संबंधित व्यक्ति की सहमति के बिना ऐसा टेस्ट नहीं किया जा सकता, इसलिए अदालत ने सीबीआई की मांग को खारिज कर दिया। इसलिए, मिश्रा का फिलहाल पॉलीग्राफ़ टेस्ट नहीं होगा।

उल्लेखनीय है कि पूर्व पार्षद अभिषेक घोसालकर (councilor Abhishek Ghosalkar) की 8 फरवरी, 2024 को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी, जब वह दहिसर में मौरिस नरहोन्हा के ऑफिस में फेसबुक लाइव कर रहे थे। एक पुराने विवाद में, मौरिस नरहोन्हा (Maurice Narhonha) नामक आरोपित ने लाइव ब्रॉडकास्ट के दौरान घोसालकर को गोली मार दी और फिर खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पूरे राज्य में भारी हंगामा हुआ।

जांच के दौरान यह पता चला कि हमले के लिए इस्तेमाल की गई पिस्तौल मौरिस नरहोन्हा के प्राइवेट बॉडीगार्ड अमरेंद्र मिश्रा (Amarendra Mishra) की थी। इसके बाद जब इस मामले की जांच को लेकर कई सवाल उठे, तो बॉम्बे उच्च न्यायालय के निर्देश पर जांच सीबीआई को ट्रांसफर कर दी गई। फिलहाल, सीबीआई मामले के सभी पहलुओं की जांच कर रही है और उम्मीद जताई जा रही है कि पॉलीग्राफ टेस्ट (polygraph test) से अहम सुराग मिल सकते हैं। घोसालकर परिवार और समर्थकों को उम्मीद है कि इस जांच से हत्या के पीछे की पूरी साजिश और सच्चाई सामने आएगी।