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New Delhi : दिग्विजय सिंह ने प्रधानमंत्री को लिखा पत्र, सीबीएसई में कक्षा 9-10 के लिए तीसरी भाषा लागू करने पर रोक की मांग


New Delhi: Digvijaya Singh writes to PM, seeks stay on implementation of third language for Classes 9-10 in CBSE

नई दिल्ली : (New Delhi) कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और शिक्षा, महिला, बाल, युवा एवं खेल संबंधी संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह (Digvijaya Singh) ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) को पत्र लिखकर सीबीएसई के कक्षा 9 और 10 के विद्यार्थियों के लिए तीसरी भाषा को अनिवार्य रूप से लागू करने के निर्णय पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यह फैसला न केवल बिना पर्याप्त तैयारी के लिया गया है बल्कि सीबीएसई की संचालन परिषद के पूर्व निर्णय के भी विपरीत है।

कांग्रेस महासचिव (संचार) जयराम रमेश (Jairam Ramesh) ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर दिग्विजय सिंह का पत्र साझा करते हुए कहा कि कक्षा 9 और 10 के पाठ्यक्रम में तीसरी भाषा को मनमाने और बिना योजना के शामिल किया जा रहा है। यह सीबीएसई संचालन परिषद के अपने निर्णय और शैक्षणिक नियोजन के स्थापित मानकों के विपरीत है।

प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में दिग्विजय सिंह ने कहा कि उन्हें सीबीएसई के कक्षा 9 के विद्यार्थियों के अभिभावकों के एक समूह की ओर से ज्ञापन प्राप्त हुआ है, जिसमें सत्र के बीच में तीन-भाषा नीति लागू करने का विरोध किया गया है। उन्होंने अभिभावकों की चिंताओं को वास्तविक बताते हुए इस विषय पर तत्काल हस्तक्षेप की आवश्यकता जताई।

दिग्विजय सिंह ने कहा कि सीबीएसई की संचालन परिषद ने दिसंबर 2025 की बैठक में पाठ्यचर्या समिति की उस सिफारिश को मंजूरी दी थी, जिसमें कहा गया था कि भाषाओं के ग्रेडेड पाठ्य पुस्तकें उपलब्ध होने तक वर्तमान भाषा व्यवस्था जारी रखी जाए। इसके बावजूद सीबीएसई ने 15 मई को जारी परिपत्र में 1 जुलाई से कक्षा 9 में तीसरी भाषा लागू करने के निर्देश दे दिए।

उन्होंने कहा कि एनसीईआरटी ने अभी तक संबंधित भाषाओं की ग्रेडेड पाठ्य पुस्तकें जारी नहीं की हैं और सीबीएसई फिलहाल कक्षा 6 की पुस्तकों के उपयोग की सिफारिश कर रहा है। इससे हजारों विद्यालयों की शैक्षणिक योजना प्रभावित होने की आशंका है।

पत्र में दिग्विजय सिंह ने दक्षिण और पूर्वोत्तर राज्यों की विशेष परिस्थितियों का भी उल्लेख भी किया। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में हिन्दी व्यापक रूप से नहीं बोली जाती और कई स्थानीय जनजातीय भाषाएं सीबीएसई की मान्यता प्राप्त भाषाओं की सूची में शामिल नहीं हैं। संस्कृत को तीसरी भाषा के रूप में अपनाने की संभावना बढ़ रही है लेकिन योग्य संस्कृत शिक्षकों और उपयुक्त पाठ्य पुस्तकों की गंभीर कमी है।

दिग्विजय सिंह ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि वर्तमान सत्र के कक्षा 9 के विद्यार्थियों के लिए इस नीति के क्रियान्वयन को तत्काल प्रभाव से स्थगित किया जाए। इस मामले पर न्यायालय में सुनवाई लंबित है और अगली सुनवाई 15 जुलाई को निर्धारित है, जबकि स्कूलों को 1 जुलाई से नई व्यवस्था लागू करनी है। ऐसे में छात्रों के हित में जल्दबाजी में निर्णय लेने से बचना चाहिए।

उन्होंने कहा कि लाखों विद्यार्थियों का शैक्षणिक भविष्य सुविचारित और तैयार नीति निर्णयों पर निर्भर करता है, इसलिए इस विषय पर संवेदनशीलता और गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

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