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New Delhi : विदेशी निवेशकों के लिए सरकारी बॉन्ड से होने वाली कमाई अब होगी टैक्स-फ्री

New Delhi: Earnings from government bonds for foreign investors to become tax-free

नई दिल्ली : (New Delhi) केंद्र सरकार (central government) ने विदेशी निवेशकों की भारतीय सरकारी प्रतिभूतियों से होने वाली आय और मुनाफ़े पर सभी तरह के टैक्स हटा दिए हैं। इस कदम का मकसद देश के सॉवरेन डेट मार्केट को ग्लोबल कैपिटल के लिए ज्यादा आकर्षक बनाना है। ये बदलाव 1 अप्रैल, 2026 से से लागू होंगे।

केंद्र सरकार ने विदेशी संस्थागत निवेशकों (Foreign Institutional Investors) (FIIs) के सरकारी प्रतिभूतियों (government securities) (G-Secs) में किए गए निवेश पर दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर (Long-Term Capital Gains) (LTCG) को समाप्त करने का फैसला किया है। मंत्रालय के मुताबिक इस संबंध में एक अध्यादेश भी जारी किया गया है। इसका मकसद देश में डॉलर के प्रवाह को बढ़ाना है। वित्त मंत्रालय ने बताया कि सरकार ने विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) को सरकारी सिक्योरिटीज (G-Secs) से होने वाली ब्याज कमाई और कैपिटल गेंस (मुनाफे) पर टैक्स से पूरी छूट दे दी है। इसके लिए भारत सरकार ‘आयकर (संशोधन) अध्यादेश, 2026’ लेकर आई है, जिसे 5 जून को जारी किया गया। यह फैसला 1 अप्रैल से प्रभावी माना जाएगा।

केंद्रीय वित्त और कॉर्पोरेट मामलों के मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट में घोषणा की कि भारत के बाहर रहने वाले व्यक्तियों (Persons Resident Outside India) (PROIs) को ‘पोर्टफोलियो इन्वेस्टमेंट स्कीम’ के जरिए सूचीबद्ध भारतीय कंपनियों के शेयर प्रतिभूतियों में निवेश करने की अनुमति दी जाएगी। यह स्कीम पहले सिर्फ एनआआई/ओसीआई के लिए उपलब्ध थी। मंत्रालय के मुताबिक इस अध्यादेश के जरिये आयकर अधिनियम में संशोधन कर यह छूट प्रदान की गई है। केंद्र सरकार ने दीर्घकालिक एवं स्थिर पूंजी आकर्षित करने के लिए सरकारी प्रतिभूतियों पर पूंजीगत लाभ कर हटाने का फैसला किया है, क्योंकि इन माध्यमों की अवधि लंबी होती है।

सरकार का यह निर्णय ऐसे समय में आया है, जब विदेशी निवेशकों ने इस वर्ष अब तक स्थानीय शेयर बाजार से भारी 2.6 लाख करोड़ रुपये की निकासी की है, जो 2025 में निकाले गए 1.66 लाख करोड़ रुपये से कहीं अधिक है। इसकी वजह वैश्विक अनिश्चितता रही है। केवल जून के पहले तीन दिन में विदेशी निवेशकों ने शेयरों से करीब 34,000 करोड़ रुपये निकाले, जिससे रुपये पर अतिरिक्त दबाव पड़ा।

विदेशी निवेशकों ने हालांकि पूर्ण पहुंच मार्ग (Fully Accessible Route) (FAR) के तहत ऋण बाजार में 17 हजार करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया है। वहीं इस वर्ष अब तक उन्होंने सामान्य ऋण सीमा के तहत करीब 4,000 करोड़ रुपये और स्वैच्छिक प्रतिधारण मार्ग (Voluntary Retention Route) (VRR) के जरिये 340 करोड़ रुपये की निकासी की है। एफआईआई को इक्विटी और ऋण निवेश से होने वाले लाभ पर वर्तमान में 12.5 फीसदी की दर से दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर देना पड़ता है।

उल्लेखनीय है कि रिजर्व बैंक (Reserve Bank) ने अलग से कुछ दीर्घावधि सॉवरेन बॉन्ड को पूरी तरह सुलभ श्रेणी में शामिल करने की अनुमति दी है, जिससे विदेशी निवेशक बिना किसी सीमा के उनमें निवेश कर सकेंगे। इस मार्ग के तहत उपलब्ध सरकारी प्रतिभूतियों की सूची में पिछला संशोधन 2024 में किया गया था जब केंद्रीय बैंक ने 14 वर्ष और 30 वर्ष के बॉन्ड को हटा दिया था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने पश्चिम एशिया संकट के कारण कच्चे तेल की आयात लागत बढ़ने के बीच लोगों से विदेशी मुद्रा बचाने की पिछले महीने अपील की थी।

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