
नई दिल्ली : (New Delhi) केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी (Union Minister for Road Transport and Highways, Nitin Gadkari) ने कहा कि देश में तेजी से विकसित हो रहे ग्रीन एक्सप्रेस-वे और नियंत्रित प्रवेश वाले राजमार्गों के कारण सड़क यात्रा का स्वरूप पूरी तरह बदल रहा है। उन्होंने कहा कि मुंबई-पुणे एक्सप्रेस-वे (Mumbai-Pune Expressway) बनने के बाद दोनों शहरों के बीच विमान सेवाएं लगभग बंद हो गई थीं और अब दिल्ली-देहरादून तथा दिल्ली-जयपुर मार्ग पर भी ऐसी स्थिति बन रही है, क्योंकि सड़क मार्ग से यात्रा समय काफी कम हो गया है।
नितिन गडकरी ने अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स इन इंडिया (AmCham) के वार्षिक नेतृत्व सम्मेलन में कहा कि आधुनिक प्रौद्योगिकी, नवाचार, अनुसंधान, कौशल और सफल कार्यप्रणालियां ही भविष्य की अर्थव्यवस्था की आधारशिला हैं। उन्होंने कहा कि ज्ञान को संपत्ति में बदलना ही भविष्य का सबसे बड़ा आर्थिक मॉडल है और भारत इसी दिशा में आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि भारत अब परिपत्र अर्थव्यवस्था की दिशा में तेजी से काम कर रहा है, जहां कचरे को संपदा में बदला जा रहा है। सड़क परिवहन मंत्रालय नगरों (Ministry of Road Transport) के पुराने ठोस कचरे का उपयोग सड़क निर्माण में कर रहा है। अब तक 90 लाख टन से अधिक ठोस नगर कचरे का उपयोग सड़क निर्माण में किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि बायो-बिटुमिन पर सफल अनुसंधान पूरा हो चुका है और अब पेट्रोलियम बिटुमिन में 30 प्रतिशत तक बायो-बिटुमिन मिलाया जा सकता है। इसके अलावा उपयोग किए जा चुके टायरों से प्राप्त 15 प्रतिशत रबर पाउडर और सात प्रतिशत प्लास्टिक का उपयोग भी सड़क निर्माण में किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस तकनीक से बनी सड़कें सफल साबित हुई हैं।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देश की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक लॉजिस्टिक लागत रही है। पहले भारत में लॉजिस्टिक लागत लगभग 16 प्रतिशत थी, लेकिन अब यह एकल अंक में पहुंच रही है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान बेंगलुरु, कानपुर और चेन्नई की हालिया रिपोर्टों के अनुसार देश की लॉजिस्टिक लागत में लगभग छह प्रतिशत तक कमी आई है। उन्होंने कहा कि ग्रीन हाईवे और नियंत्रित प्रवेश वाले एक्सप्रेस-वे इस बदलाव का सबसे बड़ा कारण हैं।
उन्होंने कहा कि दिल्ली-देहरादून मार्ग पर पहले आठ से नौ घंटे लगते थे, लेकिन नया ग्रीन हाईवे बनने के बाद यह दूरी लगभग दो घंटे में तय हो रही है। दिल्ली-मुंबई मार्ग पर पहले 48 घंटे तक लगते थे, लेकिन एक्सप्रेस-वे का 80 प्रतिशत कार्य पूरा होने के बाद यह यात्रा लगभग 12 घंटे में संभव हो गई है। दिल्ली-जयपुर मार्ग पर यात्रा समय घटकर ढाई घंटे रह गया है। दिल्ली-मेरठ मार्ग पर चार घंटे की यात्रा अब 45 मिनट में पूरी हो रही है। बेंगलुरु-मैसूर मार्ग पर यात्रा समय साढ़े तीन घंटे से घटकर लगभग एक घंटा रह गया है।
गडकरी ने कहा कि देशभर में 36 नियंत्रित प्रवेश वाले राजमार्ग विकसित किए जा रहे हैं। उत्तर भारत को दक्षिण भारत से जोड़ने के लिए बड़े पैमाने पर सड़क परियोजनाओं पर काम चल रहा है। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे (Delhi-Mumbai Expressway) को सूरत तक जोड़ा जा रहा है, जहां से नासिक, अहमदनगर, सोलापुर, कुरनूल, चेन्नई, बेंगलुरु, कन्याकुमारी, कोच्चि और तिरुवनंतपुरम तक नई सड़क परियोजनाएं विकसित की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद दिल्ली और चेन्नई के बीच दूरी लगभग 340 किलोमीटर तक कम हो जाएगी।
उन्होंने कहा कि देश में सुरंग निर्माण कार्य भी तेज गति से चल रहा है। मनाली से रोहतांग दर्रे तक पहले साढ़े तीन घंटे लगते थे, लेकिन सुरंग बनने के बाद यह दूरी मात्र आठ मिनट में तय हो रही है। कारगिल क्षेत्र में पांच नई सुरंगों का निर्माण किया जा रहा है और जोजिला सुरंग का लगभग 80 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। इसे एशिया की सबसे लंबी सुरंग है। इसके अलावा सोनमर्ग और श्रीनगर क्षेत्र में भी नई सुरंग परियोजनाओं पर कार्य जारी है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। देश हर वर्ष लगभग 22 लाख करोड़ रुपये का जीवाश्म ईंधन आयात करता है, जो वायु प्रदूषण का भी बड़ा कारण है। सरकार एथेनॉल, मेथेनॉल, जैव डीजल, तरलीकृत प्राकृतिक गैस, विद्युत और हाइड्रोजन जैसे वैकल्पिक ईंधनों पर तेजी से काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि हाइड्रोजन भविष्य का ईंधन है और भारत में इसके लिए कई प्रायोगिक परियोजनाएं शुरू की गई हैं। ग्रेटर नोएडा-दिल्ली-आगरा, अहमदाबाद-वडोदरा-सूरत, पुणे-मुंबई, जमशेदपुर-कलिंगनगर, तिरुवनंतपुरम-कोच्चि और कोच्चि-एर्नाकुलम सहित 10 मार्गों पर हाइड्रोजन ईंधन आधारित वाहनों का परीक्षण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि टाटा के हाइड्रोजन ईंधन आधारित ट्रकों का भी परीक्षण शुरू हो चुका है।
गडकरी ने कहा कि भारत अब इलेक्ट्रोलाइजर निर्माण में दुनिया में अग्रणी देशों में शामिल हो रहा है। सरकार का लक्ष्य हाइड्रोजन उत्पादन लागत को एक डॉलर प्रति किलोग्राम तक लाना है। उन्होंने कहा कि कृषि अवशेष, जैविक नगर कचरे और बायोमास से हाइड्रोजन तथा जैव-सीएनजी उत्पादन पर भी काम किया जा रहा है। दिल्ली में पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए 400 से अधिक परियोजनाएं शुरू की गई हैं, जिनमें से 200 परियोजनाओं पर काम शुरू हो चुका है।


