
कोलकाता : (Kolkata) दक्षिण 24 परगना जिले के मगराहाट पश्चिम विधानसभा क्षेत्र से तीन बार विधायक रह चुके और ममता बनर्जी सरकार में राज्य मंत्री रह चुके गियासुद्दीन मोल्ला (Giyasuddin Molla) ने तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी (Trinamool Congress National General Secretary and Lok Sabha MP Abhishek Banerjee) तथा एक पुलिस अधिकारी मिथुन कुमार डे (Mithun Kumar Dey) के खिलाफ स्थानीय थाने में शिकायत दर्ज कराई है।
शिकायत दर्ज होने की पुष्टि करते हुए गियासुद्दीन मोल्ला ने रविवार को कहा कि वे लंबे समय तक भय के कारण चुप रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें अपनी ही पार्टी के कार्यकर्ताओं और प्रशासनिक कार्रवाई से डर था। अब उन्हें नई प्रशासनिक व्यवस्था और मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी (Chief Minister Suvendu Adhikari) के नेतृत्व वाली सरकार पर भरोसा है, इसलिए उन्होंने शिकायत दर्ज कराने का निर्णय लिया है।
गियासुद्दीन मोल्ला मगराहाट पश्चिम सीट से 2011 से 2026 (Magrahat West seat from 2011 to 2026) तक लगातार विधायक रहे हैं। हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में उन्हें पार्टी ने दोबारा उम्मीदवार नहीं बनाया, जिसके बाद उनकी जगह शमीम अहमद मोल्ला को टिकट दिया गया, जो वर्तमान विधानसभा के विधायकों में शामिल हैं।
मोल्ला के अनुसार, तत्कालीन उपमंडल पुलिस अधिकारी मिथुन कुमार डे पर आरोप है कि वे क्षेत्र के कुछ तृणमूल कार्यकर्ताओं के खिलाफ अनुचित दंडात्मक कार्रवाई करते थे। मोल्ला ने दावा किया कि एक पार्टी कार्यकर्ता की पुलिस थाने के अंदर पिटाई की गई और मानसिक तथा शारीरिक उत्पीड़न किया गया।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जब उन्होंने इस मामले का विरोध किया तो पुलिस अधिकारी ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया और लाठी लेकर उन पर हमला करने के लिए दौड़े। मोल्ला का कहना है कि उन्होंने इस पूरे मामले की जानकारी ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी (Mamata Banerjee and Abhishek Banerjee) दोनों को दी थी, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ।
मोल्ला ने आरोप लगाया कि अभिषेक बनर्जी को इन घटनाओं की पूरी जानकारी थी और पुलिस अधिकारी ने कथित तौर पर उनके निर्देश पर काम किया।
गौरतलब है कि मिथुन कुमार डे को हाल ही में चुनाव आयोग द्वारा चुनाव संबंधी ड्यूटी से पहले ही हटा दिया गया था।
इस बीच, हाल ही में कोलकाता के विधाननगर साइबर अपराध थाने में अभिषेक बनर्जी के खिलाफ भी एक प्राथमिकी दर्ज की गई थी, जिसमें उन पर चुनाव से पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Union Home Minister Amit Shah) को कथित तौर पर धमकी देने और हिंसा भड़काने का आरोप लगाया गया था।
तृणमूल कांग्रेस ने इन सभी आरोपों को राजनीतिक प्रतिशोध बताया है और कहा है कि बदले हुए राजनीतिक हालात में उनके नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है।


