
पटना : (Patna) दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच (Crime Branch of the Delhi Police) ने एक ऐसे संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो NEET परीक्षा के क्वेश्चन पेपर और MBBS में एडमिशन दिलाने का झांसा देकर छात्रों और उनके परिवारों से भारी रकम वसूल रहा था. इस मामले में RJD के राष्ट्रीय सचिव संतोष कुमार जायसवाल (RJD National Secretary Santosh Kumar Jaiswal) को कथित मास्टरमाइंड बताया गया है. पुलिस ने उनके साथ तीन अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया है. पुलिस जांच में सामने आया कि तीन मई को हुई (NEET UG 2026) परीक्षा से पहले इस गिरोह ने कई छात्रों और उनके परिवारों से संपर्क किया था. मेडिकल कॉलेज में सीट दिलाने और कथित क्वेश्चन पेपर उपलब्ध कराने के नाम पर छात्रों को अलग-अलग जगहों पर ले जाया गया. पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 18 छात्रों को इनके चंगुल से बाहर निकाला, जिनमें कई नाबालिग भी शामिल थे.
20 से 30 लाख रुपये तक की मांग
आरोपियों ने अभिभावकों से 20 से 30 लाख ranging from (₹20 to ₹30 lakhs) रुपये तक मांगे. कई परिवारों से एडवांस पैसा, 10वीं-12वीं की मार्कशीट और हस्ताक्षर किए गए खाली चेक भी लिए गए. गिरोह दावा करता था कि वह परीक्षा से पहले क्वेश्चन पेपर और बाद में मेडिकल कॉलेज में एडमिशन कर देगा.
ऐसे तैयार किए जाते थे फर्जी प्रश्न पत्र
जांच में पता चला कि कथित प्रश्न पत्र असल में पुराने सालों के पेपर और कोचिंग सामग्री को जोड़कर बनाए गए थे. इन्हें असली बताकर छात्रों और परिवारों को गुमराह किया जाता था. पुलिस ने 149 पन्नों की फर्जी प्रश्न-उत्तर सामग्री (149 pages of fake question-and-answer material) बरामद की है. दिल्ली पुलिस को सूरत पुलिस से इस गिरोह की गतिविधियों की सूचना मिली थी. इसके बाद तकनीकी निगरानी के जरिए महिपालपुर और गाजियाबाद में छापेमारी की गई. होटल और फ्लैट से छात्रों को छुड़ाया गया. पुलिस ने डॉक्टर अखलाक आलम, संत प्रताप सिंह और विनोद पटेल (Dr. Akhlaq Alam, Sant Pratap Singh, and Vinod Patel) को भी गिरफ्तार किया.


