
लखनऊ : (Lucknow) योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने कहा कि उत्तर प्रदेश अब बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट अपने संसाधनों से पूरा करने में सक्षम है। करीब 600 किमी लंबा गंगा एक्सप्रेस-वे (600-km-long Ganga Expressway) बिना बैंक कर्ज के तैयार किया गया, जिस पर 36,000 करोड़ रुपये से अधिक खर्च हुआ, जबकि इंडस्ट्रियल-लॉजिस्टिक हब समेत कुल लागत 42,000 करोड़ रुपये से ऊपर पहुंची।
सीएम ने बताया कि एक्सप्रेस-वे के किनारे 9 इंडस्ट्रियल व लॉजिस्टिक हब (nine industrial and logistics hubs) विकसित किए जा रहे हैं, जिनके लिए करीब 7,000 एकड़ जमीन अधिग्रहित की गई है। उन्होंने कहा कि 2017 के बाद वित्तीय अनुशासन और संसाधन प्रबंधन से प्रदेश ‘बीमारू’ छवि से निकलकर “रेवेन्यू सरप्लस स्टेट” (revenue-surplus state) बना है।
लोक भवन (Lok Bhawan) में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने 500 लेखा परीक्षकों (371 सहकारी/पंचायत लेखा, 129 स्थानीय निधि) को नियुक्ति पत्र भी वितरित किए। उन्होंने दावा किया कि राज्य की अर्थव्यवस्था, बजट और प्रति व्यक्ति आय में करीब तीन गुना वृद्धि हुई है।
2017 से पहले बैंक करते थे आनाकानी
सीएम योगी ने कहा कि 2017 से पहले बैंक कर्ज देने को तैयार नहीं थे, लेकिन अब निवेशक खुद आगे आ रहे हैं। उन्होंने लखनऊ के जेपीएनआईसी प्रोजेक्ट (JPNIC project) का हवाला देते हुए 200 करोड़ की लागत बढ़कर 860 करोड़ होने और परियोजना अधूरी रहने को वित्तीय कुप्रबंधन बताया।
उन्होंने यह भी कहा कि एक्साइज राजस्व (excise revenue) 12,000 करोड़ से बढ़कर 62-63 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचा है, जो लीकेज रोकने और बेहतर प्रबंधन का परिणाम है।


