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New Delhi/Mumbai : कोल्हापुर ब्लैकमेलिंग कांड

नई दिल्ली/मुंबई : (New Delhi/Mumbai) कोल्हापुर में महिलाओं और नाबालिग लड़कियों के यौन शोषण और डिजिटल ब्लैकमेलिंग (blackmailing of women and minor girls in Kolhapur) के सनसनीखेज मामले ने अब राष्ट्रीय स्तर पर हड़कंप मचा दिया है। राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने इस मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए महाराष्ट्र पुलिस को कड़ी कार्रवाई के निर्देश जारी किए हैं।

क्या है मामला?
कोल्हापुर का यह मामला एक 22 वर्षीय फार्मेसी छात्र से जुड़ा है। आरोप है कि उसने सोशल मीडिया के जरिए महिलाओं और नाबालिग लड़कियों को अपने जाल में फँसाया। वह न केवल उनका शारीरिक शोषण करता था, बल्कि उनके अश्लील वीडियो रिकॉर्ड कर उन्हें लंबे समय तक ब्लैकमेल भी करता रहा।

एनसीडब्ल्यू ने जताई बड़े नेटवर्क की आशंका
राष्ट्रीय महिला आयोग ने इस घटना को महिलाओं की गरिमा पर गहरा प्रहार बताया है। आयोग की अध्यक्ष ने महाराष्ट्र के डीजीपी को पत्र लिखकर निर्देश दिया है कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए भारतीय न्याय संहिता (BNS), पोक्सो (POCSO) एक्ट और आईटी एक्ट (POCSO Act, and the IT Act) की सख्त धाराओं के तहत कार्रवाई की जाए। आयोग ने अपने आधिकारिक बयान में एक चौंकाने वाला संदेह जताया है। आयोग का मानना है कि यह किसी एक व्यक्ति का काम नहीं, बल्कि इसके पीछे एक बड़ा आपराधिक सिंडिकेट या नेटवर्क हो सकता है जो डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर कम उम्र की लड़कियों को निशाना बना रहा है। हाल ही में अमरावती में हुई इसी तरह की गिरफ्तारी के बाद यह आशंका और प्रबल हो गई है।

आपत्तिजनक सामग्री हटाने और साइबर फॉरेंसिक जांच का अल्टीमेटम
यह घटना डिजिटल युग में महिलाओं की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े करती है। आयोग ने निर्देश दिया है कि सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से सभी आपत्तिजनक सामग्री को तुरंत हटाया जाए। साथ ही, साइबर फॉरेंसिक जांच के जरिए यह पता लगाया जाए कि क्या ये वीडियो किसी पोर्नोग्राफी साइट या डार्क वेब पर भी साझा किए गए थे। आयोग ने महाराष्ट्र पुलिस को मामले की तह तक जाने के लिए केवल 7 दिनों का समय दिया है। इस दौरान पुलिस को सभी पीड़ितों की पहचान करने, मुख्य आरोपी के सहयोगियों को गिरफ्तार करने और की गई कार्रवाई की एक विस्तृत रिपोर्ट दिल्ली स्थित आयोग के मुख्यालय में जमा करानी होगी।

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