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New Delhi : पश्चिम बंगाल में भाजपा ने वार रूम से रखी एक एक बूथ पर नजर

New Delhi: BJP Monitors Every Single Booth in West Bengal from Its War Room

काल सेंटर और सोशल मीडिया के जरिए बनाई नीचे तक पंहुच
नई दिल्ली : (New Delhi)
भय बनाम भरोसे (“Fear versus Trust”) को मुद्दा बना कर चुनाव लड़ रही भाजपा पश्चिम बंगाल में सटीक रणनीति से अपने मुद्दों को जनता तक पहुंचाने में सफल रही है। वार रूम, काल सेंटर और सोशल मीडिया के जरिए तो पार्टी ने हर बूथ को कवर किया ही है, साथ ही ममता बनर्जी के (anti-Mamata Banerjee) विरोध में भी अपनी बात नीचे तक पहुंचाई है। पार्टी ने अपनी रणनीति में कोलकाता के मुख्य चुनावी वार रूम को हर विधानसभा से जोड़ा, सिलीगुड़ी में उत्तर बंगाल के लिए अलग से केंद्र बनाया और साठ हजार वाट्सएप समूहों के जरिए लोगों तक अपने वादों के साथ भरोसे की बात पहुंचाई।

मतदान और चुनाव परिणाम की प्रतीक्षा
पश्चिम बंगाल में मतदान समाप्त होने के बाद अब सभी को चार मई का इंतजार है कि राज्य की जनता बदलाव की तरफ जाती है या फिर मौजूदा सरकार में ही भरोसा जताती है। हालांकि पूरे चुनाव अभियान के दौरान लड़ाई कांटे की दिखी और भाजपा ने अपनी रणनीति से मतदाताओं तक पहुंच बनाने और उन्हें बदलाव के लिए प्रभावित करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। उसने महीनों पहले से ही काम शुरू कर दिया था और चुनाव के दौरान केंद्रीय नेताओं ने सीधी कमान संभालते हुए एक-एक बूथ पर नजर रखी।

वार रूम और रणनीतिक तैयारी
रणनीति के हिसाब से भाजपा ने अपना चुनावी वार रूम तो कोलकाता में बनाया था, लेकिन उसके एक केंद्र सिलीगुड़ी में भी बनाया ताकि उत्तर बंगाल के अपने गढ़ को और मजबूत किया जा सके। पार्टी ने वैसे तो राज्य के पांच क्षेत्रों में अपने प्रमुख रणनीतिकारों को तैनात किया, लेकिन गतिविधियों के प्रमुख केंद्र कोलकाता और सिलीगुड़ी के साथ दुर्गापुर को भी बनाया गया।

सूत्रों के अनुसार कोलकाता के मुख्य वार रूम में लगभग तीन सौ लोगों की टीम चौबीसों घंटे हर विधानसभा क्षेत्र के संपर्क में रही जो वहां से आने वाली हर सूचना को पार्टी के चुनाव प्रबंधकों और रणनीतिकारों तक पहुंचाती रही। हर विधानसभा क्षेत्र (assembly constituency) को हर बूथ से जोड़ा गया। वार रूम की टीम शिकायतों, सूचनाओं व समस्याओं को उनके महत्व के अनुसार पार्टी नेताओं के साथ चुनाव आयोग, पुलिस-प्रशासन तक से सतत संपर्क बनाए रखी।

मतदाता संपर्क और प्रतिक्रिया
काल सेंटरों के जरिए लगभग 90 फीसद मतदाताओं के साथ संपर्क किया गया। कई मतदाताओं से एक बार से ज्यादा भी संपर्क हुआ। इसमें एकतरफा पार्टी का प्रचार व फीडबैक वाले दोनों तरीकों का इस्तेमाल किया गया। शुरुआत में फीडबैक कम मिला, लेकिन बाद में यह साठ से सत्तर फीसद तक पहुंच गया। इसका लाभ पार्टी को अपनी रणनीति में मिला। लगभग साठ हजार वाट्सएप समूहों के जरिए अपनी सूचनाएं नीचे तक पहुंचाई गई। इनके जरिए दस मिनट में सूचनाएं लोगों तक पहुंच जाती थी। इन सभी पर एक निगरानी तंत्र भी लगातार काम कर रहा था। भाजपा नेताओं का कहना है कि उसने महिलाओं को जो तीन हजार रुपए देने का वादा किया, उसे ममता बनर्जी ने ही लोगों से यह कह कर पहुंचाया कि भाजपा कभी नहीं देगी। भाजपा ने इसके लिए जो फार्म भरवाए उसका भी विरोध किया। इस तरह भाजपा का यह संदेश विरोध के जरिए ही लोगों तक पहुंच गया।

चुनावी तैयारी और चुनौती
सूत्रों के अनुसार पार्टी ने राज्य की 214 सीटों के लिए पूरी चाक चौबंद तैयारी की और बाकी अस्सी सीटों पर विपक्ष को काउंटर करने की रणनीति अपनाई। यह अस्सी सीटें वह हैं जो मुस्लिम बहुल हैं और वहां तक तीसरी ताकत के न होने वोटों के बंटवारे की संभावना कम हैं। हालांकि पार्टी का मानना है कि अगर बदलाव की लहर चली तो वह इन सीटों पर भी नहीं रुकेगी। पूरे अभियान में रणनीतिक रूप से भाजपा को तृणमूल कांग्रेस की रणनीति बना रही आई पैक से कड़ी चुनौती मिली, जिसकी राज्य के हर हिस्से और हर तबके तक व्यापक पहुंच थी।

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