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New Delhi : भारत में सात साल बाद ईरानी कच्चे तेल की वापसी, प्रमुख बंदरगाहों पर पहुंचे तेल टैंकर

New Delhi: Return of Iranian Crude Oil to India After Seven Years; Tankers Arrive at Major Ports

नई दिल्ली : (New Delhi) पश्चिम एशिया संकट एवं ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी की घोषणा के बीच ईरानी कच्चा तेल लेकर आए दो बड़े टैंकर भारत के पूर्वी एवं पश्चिमी तट के बंदरगाहों पर पहुंच गए हैं, जो लगभग 7 वर्षों में ऐसी पहली आपूर्ति है। शिप ट्रैकिंग डेटा (ship-tracking data) से यह जानकारी मिली है।

शिप ट्रैकिंग की ओर से सोमवार को जारी डेटा के अनुसार ईरानी कच्चे तेल से भरा एक क्रूड ऑयल टैंकर (crude oil tanker) ओडिशा के पारादीप बंदरगाह के पास पहुंचने के बाद एक और ईरानी तेल टैंकर गुजरात के सिक्का बंदरगाह के एंकरेज पर पहुंच गया है। इस जहाज में करीब 20 लाख बैरल कच्चा तेल लदा है, जिसे मार्च के मध्य में खार्ग द्वीप से लादा गया था।

शिप ट्रैकिंग के मुताबिक यह तेल टैंकर लगभग सात वर्षों में भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचने वाले ईरानी क्रूड के पहले कार्गो हैं। नेशनल ईरानियन टैंकर कंपनी (National Iranian Tanker Company) द्वारा संचालित ‘फेलिसिटी’ नामक एक बड़ा कच्चा तेल वाहक जहाज ने रविवार देर रात गुजरात तट के सिक्का के पास लंगर डाला। इस जहाज में करीब 20 लाख बैरल कच्चा तेल है, जिसे मार्च के मध्य में खार्ग द्वीप से लादा गया था।

इसी समय के आसपास एक दूसरा तेल टैंकर, ‘जया’, ओडिशा के तट पर पारादीप के पास आकर रुका है। यह जहात भी लगभग उतनी ही मात्रा में कच्चा तेल ले जा रहा है, जिसे फरवरी के अंत में खर्ग द्वीप से लिया गया था। ये खेप पिछले महीने अमेरिका द्वारा दी गई सीमित प्रतिबंध छूट के बाद आई हैं, जिसके तहत पहले से ही रास्ते में मौजूद ईरानी तेल की बिक्री की अनुमति दी गई थी।

7 साल के बाद पहली ईरानी कच्चे तेल का खेप

कच्चे तेल का ये खेप लगभग सात साल में भारतीय तटों पर पहुंचने वाली ईरानी कच्चे तेल की पहली खेप हैं। यह अमेरिका द्वारा पिछले महीने जारी की गई प्रतिबंधों में छूट (सैंक्शन्स वेवर) के बाद संभव हुआ है। इस एक महीने की छूट ने उस ईरानी तेल की बिक्री की अनुमति दी जो पहले से ही रास्ते में था। इसका उद्देश्य ग्लोबल सप्लाई चेन में आई बाधाओं को कम करना और कीमतों को नियंत्रित करना था। हालांकि, पाकिस्थान में सप्ताह के अंत में शांति वार्ता विफल होने के बाद वाशिंगटन ने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी की घोषणा कर दी, जिसका उद्देश्य तेहरान के तेल निर्यात से होने वाली आय पर अंकुश लगाना है।

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