
मुख्यमंत्री फडणवीस ने महिला आरक्षण को बताया फुले के विचारों की जीत
मुंबई : (Mumbai) महात्मा ज्योतिबा फुले की द्विशताब्दी (birth anniversary year (200th anniversary) of Mahatma Jyotiba Phule) जयंती वर्ष (200वीं जयंती) के अवसर पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Maharashtra Chief Minister Devendra Fadnavis) ने पुणे के खानवडी में एक ऐतिहासिक शुरुआत की। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) द्वारा महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में 33% आरक्षण देने के निर्णय को महात्मा फुले के विजन के प्रति सबसे बड़ी श्रद्धांजलि बताया। मुख्यमंत्री फडणवीस ने जोर देकर कहा कि महात्मा ज्योतिबा फुले और सावित्रीबाई फुले (Mahatma Jyotiba Phule and Savitribai Phule) ने जिस महिला शिक्षा और सशक्तीकरण की नींव रखी थी, प्रधानमंत्री मोदी का नारी शक्ति वंदन अधिनियम (33% आरक्षण) उसी का विस्तार है। उन्होंने इसे समाज सुधार के इतिहास में एक मील का पत्थर बताया।
राज्य का पहला सीबीएसई जिला परिषद विद्यालय
पुणे जिला परिषद द्वारा निर्मित ‘ज्योति-सावित्री जिला परिषद विद्यालय’ (‘Jyoti-Savitri District Council School’) महाराष्ट्र का पहला ऐसा सरकारी स्कूल है जो कक्षा 1 से 12 तक CBSE पद्धति पर आधारित है। मुख्यमंत्री ने इसे द्विशताब्दी वर्ष की सबसे उपयुक्त शुरुआत बताया, जहाँ ग्रामीण बच्चों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलेगी।समारोह के दौरान मुख्यमंत्री ने गर्व से बताया कि इस विद्यालय की छात्राएं इसरो (ISRO) और नासा (NASA) जैसी वैश्विक संस्थाओं तक अपनी पहुँच बना चुकी हैं। ग्रामीण परिवेश के बच्चों का फ्रेंच और जर्मन जैसी विदेशी भाषाएं सीखना इस बात का प्रमाण है कि शिक्षा की खाई अब पट रही है।
महात्मा फुले एक दूरदर्शी उद्यमी और किसान: मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री ने महात्मा फुले के बहुआयामी व्यक्तित्व को याद करते हुए कहा कि वे केवल समाज सुधारक नहीं थे, बल्कि एक सफल उद्यमी और प्रगतिशील किसान भी थे। खडकवासला बांध, येरवडा जेल और कात्रज सुरंग जैसे निर्माण कार्यों में उनकी दूरदर्शिता आज भी स्पष्ट दिखाई देती है। उन्होंने कृषि में ‘साल भर आय’ (‘year-round income’) का जो मॉडल दिया, वह आज भी प्रासंगिक है। मुख्यमंत्री ने इस बात का विशेष उल्लेख किया कि इस आधुनिक विद्यालय की स्थापना पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार (Deputy Chief Minister Ajit Pawar) की व्यक्तिगत पहल और सतत निगरानी का परिणाम है। इस कार्यक्रम में राज्य मंत्रिमंडल के कई वरिष्ठ मंत्री (छगन भुजबल, चंद्रकांत पाटिल, दादाजी भुसे आदि) मौजूद थे, जो सरकार की शिक्षा के प्रति साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।


