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New Delhi : फर्जी अकाउंट्स से ग्राहकों को गुमराह करती हैं रिव्यू ब्रोकर एजेंसियां

New Delhi: Review Broker Agencies Mislead Customers Using Fake Accounts

ऑनलाइन शॉपिंग में बढ़ता फेक रिव्यू का जाल
नई दिल्ली : (New Delhi)
ऑनलाइन शॉपिंग करते समय हम अक्सर किसी प्रोडक्ट की स्टार रेटिंग (product’s star rating) देखकर फैसला लेते हैं। लेकिन अब यह भरोसा पूरी तरह सुरक्षित नहीं रहा। एक नई जांच में खुलासा हुआ है कि रिव्यू और रेटिंग को योजनाबद्ध तरीके से मैनेज किया जा रहा है, जिससे ग्राहकों को गुमराह किया जा रहा है। हाल ही में कॉम्पिटीशन एंड मार्केट्स अथॉरिटी की जांच में सामने आया कि अब सिर्फ फेक रिव्यू लिखवाने तक बात सीमित नहीं है, बल्कि कंपनियां रिव्यू के समय, संख्या और पैटर्न को भी कंट्रोल कर रही हैं। इसका मकसद साफ है प्रोडक्ट को ज्यादा भरोसेमंद दिखाना और उसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म (e-commerce platforms) पर ऊपर लाना। यानी अब रेटिंग सिर्फ ग्राहकों की राय नहीं, बल्कि एक रणनीति का हिस्सा बन गई है। इससे यह भी साफ हो गया है कि ऑनलाइन दिखने वाला ‘5-स्टार भरोसा’ (“5-star credibility”) कई बार असली नहीं होता, बल्कि इसे जानबूझकर बनाया जाता है।

संगठित नेटवर्क का खेल
यह काम अब किसी एक व्यक्ति का नहीं रहा। जांच में पता चला है कि इसके पीछे पूरा नेटवर्क काम कर रहा है, जिसे रिव्यू ब्रोकर एजेंसियां (“review broker agencies.”) चलाती हैं।
ये एजेंसियां हजारों फर्जी अकाउंट्स के जरिए रिव्यू पोस्ट करवाती हैं, जिससे ऐसा लगता है कि बहुत सारे लोग एक ही प्रोडक्ट को पसंद कर रहे हैं।
इस तरह का सिस्टम ग्राहकों के बीच भरोसे का माहौल बनाने के लिए बनाया जाता है, लेकिन असल में यह एक संगठित कारोबार बन चुका है।

एल्गोरिद्म कैसे करता है असर?
ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म का एल्गोरिद्म उन प्रोडक्ट्स (algorithms prioritize) को ऊपर दिखाता है, जिनकी रेटिंग ज्यादा होती है और जिन पर लगातार एक्टिविटी रहती है। इसी का फायदा उठाकर कंपनियां रिव्यू की क्वालिटी सुधारने के बजाय उसकी संख्या और टाइमिंग को मैनेज करती हैं। यानी असली मुकाबला अच्छे प्रोडक्ट का नहीं, बल्कि ज्यादा दिखने वाले प्रोडक्ट का हो गया है। इस पूरे खेल का सबसे बड़ा नुकसान आम ग्राहकों को होता है। वे जिस प्रोडक्ट को ‘टॉप रेटेड’ समझकर खरीदते हैं, वह असल में औसत या खराब भी हो सकता है। इससे न सिर्फ पैसे का नुकसान होता है, बल्कि ऑनलाइन शॉपिंग पर भरोसा भी कम होता है। धीरे-धीरे यह समस्या पूरे डिजिटल मार्केट में भरोसे के संकट का कारण बन सकती है।

फेक रिव्यू कैसे पहचानें?
कुछ आसान तरीकों से फेक रिव्यू की पहचान की जा सकती है। जैसे अगर बहुत कम समय में अचानक बहुत सारे पॉजिटिव रिव्यू आ जाएं, तो यह शक का संकेत हो सकता है। अक्सर ऐसे रिव्यू में एक जैसे वाक्य होते हैं, जैसे ‘बहुत अच्छा प्रोडक्ट’ या ‘जरूर खरीदें’(“Excellent product” or “A must-buy.”)। इसके अलावा, अगर किसी प्रोडक्ट के नेगेटिव रिव्यू कम दिखते हैं या अचानक गायब हो जाते हैं, तो भी सावधान रहना चाहिए।

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