
राज्यों की लचर रिपोर्ट पर कोर्ट ने जताई नाराजगी
नई दिल्ली : (New Delhi) देश में बढ़ते बाल तस्करी के मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने गहरी चिंता जताई है। कोर्ट ने कहा कि संगठित गिरोह देशभर में सक्रिय हैं और अगर राज्य सरकारों व केंद्र शासित प्रदेशों ने तुरंत प्रभावी कदम नहीं उठाए, तो स्थिति नियंत्रण से बाहर हो सकती है। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन (Justice J.B. Pardiwala and Justice K.V. Viswanathan) की पीठ ने बुधवार को एक याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा कि अदालत निगरानी कर सकती है, लेकिन वास्तविक कार्रवाई राज्य सरकार, पुलिस और संबंधित एजेंसियों को ही करनी होगी। कोर्ट ने इस मुद्दे पर राज्यों के लापरवाह रवैया पर नाराजगी जताई। पीठ ने कहा कि कुछ मामलों में बच्चों की बरामदगी से यह स्पष्ट है कि समस्या से निपटा जा सकता है, लेकिन इसके लिए जरूरी राजनीतिक और प्रशासनिक इच्छाशक्ति फिलहाल नजर नहीं आ रही है।
2025 के फैसले का दिया हवाला
सुप्रीम कोर्ट ने 15 अप्रैल 2025 (verdict dated April 15, 2025) के अपने फैसले का हवाला देते हुए कहा कि उस निर्णय में संगठित तस्करी नेटवर्क को तोड़ने के लिए कई संस्थागत सुधारों के निर्देश दिए गए थे। इनमें तस्करी के मामलों में छह महीने के भीतर दिन-प्रतिदिन सुनवाई कर ट्रायल पूरा करना, एंटी-ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट्स (AHTUs) को मजबूत करना और जांच प्रक्रिया में सुधार करना शामिल था।
राज्यों को क्या दिए निर्देश?
इसके अलावा, कोर्ट ने राज्यों को निर्देश दिया था कि वे तस्करी के संभावित हॉटस्पॉट की पहचान और निगरानी के लिए राज्य स्तरीय समितियां बनाएं और लापता बच्चों के मामलों को तस्करी मानकर जांच शुरू करें, जब तक कि अन्यथा साबित न हो। हालांकि, कोर्ट ने कहा कि कई राज्यों द्वारा दाखिल अनुपालन रिपोर्ट सिर्फ औपचारिकता हैं। बुधवार को सुनवाई के दौरान यह सामने आया कि मध्य प्रदेश, गोवा, हरियाणा, लक्षद्वीप, मिजोरम, ओडिशा और पंजाब ने (Madhya Pradesh, Goa, Haryana, Lakshadweep, Mizoram, Odisha, and Punjab) अभी तक तय प्रारूप में रिपोर्ट दाखिल नहीं की है।


