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Puducherry : थलपति विजय का ‘मास्टरस्ट्रोक’

Puducherry: Thalapathy Vijay's 'Masterstroke'

पुदुचेरी : (Puducherry) आगामी नौ अप्रैल को होने वाले पुदुचेरी विधानसभा चुनावों (Puducherry Assembly elections) के मद्देनजर टीवीके के प्रमुख विजय (TVK chief Vijay) ने कांग्रेस-डीएमके गठबंधन को भ्रमित गठबंधन करार दिया। वहीं, विजय ने एनआर कांग्रेस-भाजपा (NR Congress-BJP) गठबंधन को थका हुआ गठबंधन बताया। उन्होंने कहा कि ये दोनों ही राष्ट्रीय दल केंद्र में वर्षों तक सत्ता में रहने के बावजूद पुदुचेरी को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने में विफल रहे हैं। पुदुचेरी में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए विजय ने मतदाताओं से केंद्र शासित प्रदेश में पार्टी के सीटी चुनाव चिन्ह का समर्थन करने का आग्रह किया। उन्होंने इसे ‘एक उंगली की क्रांति’ (“one-finger revolution”) की शुरुआत बताया, जो शायद उनकी किसी फिल्म के डायलॉग से जुड़ा था।

पुदुचेरी को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने की भरी हुंकार
विजय ने वादा किया कि अगर उनकी पार्टी सत्ता में आती है, तो वे पुदुचेरी को उपराज्यपाल के हस्तक्षेप से मुक्त करते हुए कानूनी रूप से पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने के लिए 100 प्रतिशत कोशिश करेंगे। अपनी पार्टी के उम्मीदवारों को जनता के साथ खड़े रहने वाले के रूप में पेश करते हुए विजय ने जन कल्याणकारी योजनाओं की एक सूची लोगों के सामने पेश की। उन्होंने आश्वासन दिया कि टीवीके के सत्ता में आने के छह महीने के भीतर स्थानीय निकाय चुनाव कराए जाएंगे।

मुफ्त बिजली और स्वास्थ्य बीमा का किया एलान
उन्होंने बताया कि पार्टी के एजेंडे में हर परिवार के लिए 25 लाख रुपये का चिकित्सा बीमा और गरीबी रेखा से नीचे रहने वालों के लिए 200 यूनिट मुफ्त बिजली प्रदान करना शामिल है। शिक्षा के क्षेत्र में विजय ने पुदुचेरी विश्वविद्यालय ऑफ एप्लाइड साइंसेज एंड आर्ट्स (“Puducherry University of Applied Sciences and Arts.”) की स्थापना की घोषणा की। क्षेत्र के विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए उन्होंने मतदाताओं से एक सुरक्षित और पारदर्शी प्रशासन प्रदान करने का अवसर मांगा।

गठबंधन की राजनीति पर क्या बोले विजय?
विजय की टिप्पणियों से पुदुचेरी में चुनावी राजनीति गरमा गई है। उन्होंने राष्ट्रीय दलों पर राज्य के विकास की उपेक्षा करने का आरोप लगाया है और क्षेत्रीय दलों के महत्व पर जोर दिया है। उनके बयान सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर संभावित दरारों और विपक्षी दलों की रणनीतियों पर बड़ा निशाना माने जा रहे हैं।

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