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New Delhi : मार्च में अमेरिकी ने भेजी 4.20 लाख टन LPG

New Delhi: US Ships 420,000 Tonnes of LPG in March

नई दिल्ली : (New Delhi) पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव (ongoing geopolitical tensions in the Middle East) का असर भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। हालिया आंकड़ों के अनुसार मार्च 2026 में देश के एलपीजी आयात (country’s LPG imports in March 2026) में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है, जिससे तेल और गैस आपूर्ति को लेकर दबाव की स्थिति बनी हुई है।

शिप ट्रैकिंग एजेंसी केप्लर (ship-tracking agency Kpler) के डेटा के मुताबिक मार्च में भारत का कुल एलपीजी आयात घटकर 1.22 मिलियन टन रह गया, जो जनवरी की तुलना में लगभग 46 प्रतिशत और फरवरी की तुलना में करीब 40 प्रतिशत कम है।

आपूर्ति में आई इस कमी के बीच वैकल्पिक स्रोतों ने कुछ हद तक राहत प्रदान की है। मार्च में संयुक्त राज्य अमेरिका भारत के लिए सबसे बड़ा एलपीजी आपूर्तिकर्ता बनकर उभरा,(United States emerged as India’s largest LPG supplier) जहां से 4.20 लाख टन गैस आयात की गई, जो जनवरी के मुकाबले 56 प्रतिशत अधिक है।

औद्योगिक क्षेत्रों—विशेषकर फार्मास्यूटिकल, खाद्य और रसायन उद्योग (pharmaceutical, food, and chemical industries) —में बढ़ती मांग को देखते हुए सरकार अब इस अस्थायी व्यवस्था को धीरे-धीरे सामान्य करने की दिशा में बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में अस्थिरता बनी रहती है, तो भारत को दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा के लिए आपूर्ति स्रोतों के विविधीकरण और रणनीतिक भंडारण को और मजबूत करना होगा।

ईरान से 43000 टन की आपूर्ति
इसके अलावा, करीब सात वर्षों के अंतराल के बाद ईरान से 43,000 टन एलपीजी की खेप भारत (hiatus of nearly seven years, a consignment of 43,000 tonnes of LPG from Iran arrived in India) पहुंची। वहीं, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, कुवैत और सऊदी अरब जैसे पारंपरिक आपूर्तिकर्ताओं से आयात में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है, जिसमें यूएई से सप्लाई जनवरी के स्तर के मुकाबले घटकर करीब 28 प्रतिशत रह गई।

60 प्रतिशत आयात पर निर्भर
स्थिति से निपटने के लिए केंद्र सरकार (Central Government) ने आपूर्ति संतुलन बनाए रखने हेतु कई तात्कालिक कदम उठाए हैं। देश अपनी कुल एलपीजी खपत का लगभग 60 प्रतिशत आयात पर निर्भर करता है, ऐसे में घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया गया। मार्च के मध्य तक घरेलू एलपीजी उत्पादन (domestic LPG production) में करीब 40 प्रतिशत की वृद्धि की गई और रिफाइनरियों को निर्देशित किया गया कि वे पेट्रोकेमिकल उत्पादन के बजाय हाइड्रोकार्बन प्रवाह को एलपीजी उत्पादन की ओर मोड़ें।

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