
पटना : (Patna) भारतीय जनता पार्टी के नेता नितिन नवीन (Bharatiya Janata Party (BJP) leader Nitin Naveen) ने बिहार विधानसभा (Bihar Legislative Assembly) की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। वह पटना के बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र (Bankipur Assembly constituency in Patna) का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। उनके इस्तीफे को पार्टी में मिली नई जिम्मेदारी से जोड़कर देखा जा रहा है।
नितिन नवीन ने अपने निर्णय की जानकारी सोशल मीडिया के माध्यम से साझा की। उन्होंने अपने संदेश में बताया कि वर्ष 2006 में पहली बार उपचुनाव के जरिए विधानसभा पहुंचने के बाद से लगातार जनसेवा का अवसर मिला। इस दौरान क्षेत्र के विकास और स्थानीय समस्याओं के समाधान को प्राथमिकता दी गई।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि बांकीपुर की जनता ने उन्हें लगातार कई बार अपना प्रतिनिधि चुना, जिससे उन्हें दीर्घकाल तक क्षेत्र की सेवा करने का अवसर मिला। अपने कार्यकाल में उन्होंने विधानसभा के भीतर और बाहर, दोनों स्तरों पर जनहित से जुड़े मुद्दों को उठाने का प्रयास किया।
जारी रहेगा विकास और बांकीपुर का विकास
नितिन नवीन ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के (Chief Minister Nitish Kumar and Prime Minister Narendra Modi) नेतृत्व में मंत्री के रूप में कार्य करने के अनुभव को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि इस दौरान विभिन्न योजनाओं और नीतियों के क्रियान्वयन में सक्रिय भूमिका निभाने का अवसर मिला।
इस्तीफे के साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि नई भूमिका में भी बिहार और अपने क्षेत्र के विकास के लिए कार्य करते रहेंगे। साथ ही, कार्यकर्ताओं और जनता के साथ अपने संबंधों को भविष्य में भी बनाए रखने की बात कही।
सीएम नितीश ने छोड़ी विधान परिषद सदस्यता
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Bihar Chief Minister Nitish Kumar) ने विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उनका यह कदम राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने के बाद उठाया गया है, जो संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप माना जा रहा है।
विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि नीतीश कुमार का इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि प्रक्रिया पूरी तरह नियमों के तहत संपन्न की गई है।
नीतीश के राज में बिहार देखा अद्भुत विकास
सभापति अवधेश नारायण सिंह (Chairman of the Legislative Council, Awadhesh Narain Singh) ने नीतीश कुमार के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में बिहार ने विकास के कई चरण देखे हैं। अब उनके केंद्र की राजनीति में जाने के साथ नई जिम्मेदारियों की शुरुआत होगी।
गौरतलब है कि किसी भी जनप्रतिनिधि के लिए एक साथ दो सदनों की सदस्यता संभव नहीं होती, ऐसे में राज्यसभा सदस्य चुने जाने के बाद विधान परिषद की सदस्यता छोड़ना आवश्यक हो जाता है।


