
शिलॉन्ग : (Shillong) मेघालय की नॉर्थ-ईस्टर्न हिल विश्वविद्यालय (North-Eastern Hill University (NEHU) in Meghalaya) के शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि कैंसर के इलाज में एशियाई वीवर चींटी (Asian weaver ant) मददगार हो सकती है। पेड़ पर घोंसला बनाने वाली एशियाई वीवर चींटी के अर्क में कैंसर से लड़ने वाले अद्भुत गुण पाए गए हैं। यह रिसर्च चूहों पर की गई, जिनमें लिंफोमा नाम की कैंसर (cancer cells associated with lymphoma) कोशिकाएं थीं। नतीजे बताते हैं कि इन चींटियों का अर्क कैंसर के इलाज की दिशा में एक सुरक्षित और प्राकृतिक विकल्प बन सकता है। जिन चूहों को चींटी का अर्क दिया गया, उनके जीवित रहने की संभावना 73 फीसदी तक बढ़ गई।
कैंसर कोशिकाओं का खात्मा
अर्क ने कैंसर कोशिकाओं में एपोप्टोसिस (process of apoptosis) की प्रक्रिया शुरू की। इसने कैंसर कोशिकाओं को खुद को नष्ट करने पर मजबूर कर दिया। कीमोथेरेपी की दवाओं के मुकाबले इस अर्क ने लिवर और किडनी को बहुत कम नुकसान पहुंचाया, जो इसके कम जहरीले होने का संकेत है।
कौन-सी चींटी असरदार?
अध्ययन में पाया गया कि वयस्क, यानी ‘कामगार चींटियों’ (“worker ants”) से बना इथेनॉल अर्क कैंसर के खिलाफ सबसे ज्यादा प्रभावी रहा।बॉक्स -परंपरा और विज्ञान का मेलपूर्वोत्तर भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया में पाई जाने वाली इन चींटियों का इस्तेमाल कई आदिवासी समुदाय सदियों से भोजन और पारंपरिक दवाओं के रूप में करते आ रहे हैं। वैज्ञानिक इसी पारंपरिक ज्ञान को लैब में परख रहे हैं। हालांकि, नतीजे शुरुआती हैं और इंसानों पर इसके इस्तेमाल के लिए और शोध की जरूरत है, लेकिन यह कैंसर की सस्ती और प्राकृतिक दवा बनाने की उम्मीद जगाती है।


