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Mumbai : बीएमसी स्कूलों में अंग्रेजी माध्यम की ओर बढ़ता रुझान

Mumbai: Growing Trend Towards English Medium in BMC Schools

मराठी-हिंदी माध्यम में गिरावट; शिक्षा बजट बढ़कर ₹4,105 करोड
मुंबई : (Mumbai)
प्रजा फाउंडेशन द्वारा जारी “मुंबई नगरपालिका की शिक्षा स्थिति 2026” (“Status of Education in Mumbai Municipality 2026” released by the Praja Foundation) रिपोर्ट में बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) (Brihanmumbai Municipal Corporation) के स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार बीएमसी स्कूलों में कुल नामांकन के अनुपात में पिछले कुछ वर्षों में हल्की बढ़ोतरी हुई है, लेकिन माध्यम के आधार पर छात्रों की पसंद में बड़ा बदलाव देखने को मिला है।

नामांकन में बढ़ोतरी, लेकिन छात्रों के टिके रहने की चुनौती

रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2019-20 में महामारी से पहले बीएमसी स्कूलों में नामांकित छात्रों का अनुपात 36 प्रतिशत (2,98,215) था। यह आंकड़ा 2021-22 में बढ़कर 42 प्रतिशत (3,18,002) हो गया और 2024-25 में 44 प्रतिशत (3,10,085) पर स्थिर रहा। हालांकि कुल नामांकन में वृद्धि हुई है, लेकिन छात्रों की प्रतिधारण दर चिंता का विषय बनी हुई है। आंकड़ों के मुताबिक 2015-16 में कक्षा 1 में प्रवेश लेने वाले 100 छात्रों में से केवल 48 छात्र ही 2024-25 तक कक्षा 10 तक पढ़ाई जारी रख पाए।

अंग्रेजी माध्यम की ओर बढ़ती प्राथमिकता
रिपोर्ट में माध्यम के आधार पर छात्रों के रुझान में बड़ा बदलाव सामने आया है। पिछले एक दशक में बीएमसी के मराठी माध्यम स्कूलों (BMC’s Marathi-medium schools) में छात्रों की संख्या में 34 प्रतिशत और हिंदी माध्यम स्कूलों में 39 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। इसके विपरीत अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में नामांकन में 54 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। यह प्रवृत्ति दर्शाती है कि बड़ी संख्या में अभिभावक अब अपने बच्चों के लिए अंग्रेजी माध्यम को प्राथमिकता दे रहे हैं।

शिक्षा व्यवस्था में आंकड़ों की केंद्रीकृत प्रणाली का अभाव
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि सर्व शिक्षा अभियान, शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (Sarva Shiksha Abhiyan, the Right to Education Act 2009, and the National Education Policy 2020) जैसी पहलों के बावजूद बीएमसी शिक्षा विभाग के पास अभी तक विद्यालय-वार, कक्षा-वार या लिंग-वार विस्तृत आंकड़ों को व्यवस्थित रखने के लिए कोई केंद्रीकृत प्रणाली उपलब्ध नहीं है।

स्वास्थ्य जांच में सुधार
स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में सकारात्मक सुधार देखने को मिला है। वर्ष 2016-17 में कुल नामांकित छात्रों में से 69 प्रतिशत (2,35,823) छात्रों की स्वास्थ्य जांच की गई थी, जो 2024-25 में बढ़कर 82 प्रतिशत (2,54,251) हो गई है।

शिक्षा बजट में वृद्धि
वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए बीएमसी के कुल ₹80,953 करोड़ के बजट में शिक्षा के लिए ₹4,105 करोड़ का प्रावधान किया गया है। प्रजा फाउंडेशन के अनुसंधान एवं विश्लेषण प्रबंधक आसिफ खान ने कहा, “₹4,105 करोड़ के रिकॉर्ड शिक्षा बजट और प्रति छात्र अनुमानित ₹1,32,372 के व्यय के साथ शिक्षा प्रणाली को मजबूत करने का एक बड़ा अवसर है। बीएमसी शिक्षा विभाग को परिणाम-आधारित बजट व्यवस्था विकसित करनी चाहिए, जिससे प्रणाली में मौजूद कमियों को दूर करने के लिए लक्षित हस्तक्षेप किए जा सकें।”

शिक्षकों के विकास और तकनीक पर जोर
बीएमसी के अतिरिक्त नगर आयुक्त अविनाश ढाकने (BMC Additional Municipal Commissioner Avinash Dhakne) ने कहा, “शिक्षकों के सतत व्यावसायिक विकास को प्राथमिकता देते हुए उन्हें प्रौद्योगिकी-समेकित कक्षाओं का नेतृत्व करने के लिए आवश्यक कौशल और आधुनिक दृष्टिकोण प्रदान किया जा रहा है। शिक्षकों के विकास में यह निरंतर निवेश नगरपालिका विद्यालयों में एक समग्र और बहुआयामी शिक्षण वातावरण को बढ़ावा देगा।”

शिक्षा सुधार के लिए संरचनात्मक बदलाव जरूरी
प्रजा फाउंडेशन के सलाहकार तथा महाराष्ट्र सरकार के पूर्व मुख्य सचिव सीताराम कुंटे (Sitaram Kunte, Advisor to the Praja Foundation and former Chief Secretary to the Government of Maharashtra) ने कहा, “नगरपालिका शिक्षा में सुधार केवल खर्च बढ़ाने से संभव नहीं है, बल्कि शासन व्यवस्था को परिणामोन्मुखी बनाने के लिए उसका पुनर्गठन करना होगा। घटते नामांकन को रोकने और गुणवत्ता के अंतर को पाटने के लिए डिजिटल शासन को संस्थागत रूप देना, सेवा-स्तरीय मानकों को लागू करना और वार्ड स्तर पर प्रशासन को मजबूत करना आवश्यक है।”

स्थानीय प्रशासन की भूमिका अहम
प्रजा फाउंडेशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मिलिंद म्हस्के (Milind Mhaske, CEO of the Praja Foundation) ने कहा कि शिक्षा सामाजिक और आर्थिक प्रगति की आधारशिला है और बीएमसी स्कूल मुंबई के निम्न सामाजिक-आर्थिक वर्गों को सुलभ सार्वजनिक शिक्षा प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि निर्वाचित प्रतिनिधियों और स्कूल प्रबंधन समितियों की सक्रिय भागीदारी से ही विद्यालय विकास योजनाओं को प्रभावी बनाया जा सकता है और नगरपालिका शिक्षा प्रणाली में जनता का विश्वास मजबूत किया जा सकता है।

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