
नई दिल्ली : (New Delhi) उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) ने देशभर के कामकाजी महिलाओं और छात्राओं को पीरियड्स के दौरान छुट्टी दिये जाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत (Chief Justice Surya Kant) की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि इस तरह की छुट्टियों को अनिवार्य बनाये जाने का एक खतरा ये भी है कि महिलाओं को नौकरी से निकाल दिया जाएगा या फिर उन्हें जॉब पाने ही में दिक्कत होने लगे।
कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा कि आप पहले ही केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (Union Ministry of Women and Child Development) के सामने अपनी बात रख चुके हैं। सरकार को सभी पक्षों से बात करके एक नीति बनाने पर विचार करना चाहिए।
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने यह भी कहा कि अगर कोई कंपनी अपनी मर्जी से पीरियड्स के दौरान छूट्टी दे रही है तो बहुत अच्छी बात है, लेकिन जैसे ही आप इसको कानून के तौर पर सख्ती से लागू करेंगे तो हो सकता है कि महिलाओं को नौकरी पाने में दिक्कत हो। उन्हें सरकारी नौकरी, न्यायपालिका या बाकी नौकरियों में रखा ही न जाए। उनका करियर ही बर्बाद हो जाए। उन्हें कह दिया जाए कि वो घर पर ही रहें।


