spot_img

Mumbai : छह नदी जोड़ परियोजनाओं को मिली मंजूरी

Mumbai: Six river linking projects approved

मुंबई : (Mumbai) राज्य सरकार ने वैनगंगा–नळगंगा समेत छह नदी जोड़ परियोजनाओं (state government has approved six river linking projects) को मंजूरी दे दी है। इसकी जानकारी मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Chief Minister Devendra Fadnavis) ने दी। उन्होंने बताया कि वैनगंगा–नळगंगा, वैतरणा–उल्हास बेसिन (Wainganga-Nalganga project, the Vaitarna-Ulhas Basin water) का पानी गोदावरी में मोड़ने की योजना, दमणगंगा–वैतरणा–गोदावरी नदी जोड़ परियोजना, नार–पार गिरणा नदी जोड़ परियोजना, दमणगंगा–एकदरे–गोदावरी परियोजना और निरा–कऱ्हा नदी जोड़ परियोजना को स्वीकृति दी गई है। हालांकि इन योजनाओं की घोषणा की गई है, लेकिन फिलहाल इनके लिए बजट में अलग से फंड का प्रावधान नहीं किया गया है।

हजारों करोड़ की परियोजनाओं को प्रशासनिक स्वीकृति

वैनगंगा–नळगंगा नदी जोड़ योजना को 94,968 करोड़ रुपये (River Linking Project, costing ₹94,968 crore) की लागत के साथ प्रशासनिक मंजूरी दी गई है। इसके तहत वैतरणा और उल्हास बेसिन के लगभग 54 टीएमसी अतिरिक्त पानी को गोदावरी बेसिन में मोड़ने की योजना है, जिसके लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की जा रही है। इसके अलावा दमणगंगा–वैतरणा–गोदावरी नदी जोड़ परियोजना को 13,497 करोड़ रुपये, नार–पार गिरणा परियोजना को 7,465 करोड़ रुपये और दमणगंगा–एकदरे–गोदावरी परियोजना को 2,213 करोड़ रुपये की लागत के साथ प्रशासनिक मंजूरी दी गई है। वहीं बारामती और पुरंदर तालुकों के सूखा प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल और सिंचाई के लिए निरा–कऱ्हा नदी जोड़ परियोजना लागू की जाएगी।

बाढ़ और सूखे से निपटने के लिए भी योजनाएं

सरकार ने कोल्हापुर और सांगली जिलों में बाढ़ और अन्य आपदाओं से निपटने के लिए विश्व बैंक (funded by the World Bank) की मदद से 2,240 करोड़ रुपये के “महाराष्ट्र राज्य प्रतिसादक्षम विकास कार्यक्रम” को भी मंजूरी दी है। इसके तहत कृष्णा बेसिन के बाढ़ के पानी को भीमा बेसिन के पश्चिम महाराष्ट्र और मराठवाड़ा के सूखा प्रभावित क्षेत्रों की ओर मोड़ने की योजना है। वहीं एल नीनो के प्रभाव से संभावित सूखा जैसी स्थिति को देखते हुए जलयुक्त शिवार अभियान और जलसंवर्धन योजनाओं के माध्यम से जल संरक्षण और चारा विकास के उपाय किए जाएंगे। साथ ही विश्व बैंक के सहयोग से 5,000 करोड़ रुपये की लागत से “महाराष्ट्र नागरी जलपुरवठा, सांडपाणी व्यवस्थापन व पुनर्वापर प्रकल्प” (Maharashtra Nagari Jalpurvatha, Sandapani Prabandhan and Punarvapar Prakalp, with World Bank support) भी लागू किया जाएगा, जिसके तहत शहरों में 100 प्रतिशत सीवेज ट्रीटमेंट और उसके पुन: उपयोग का लक्ष्य रखा गया है।

Explore our articles