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Mumbai : चयन सहायक अध्यापक पद पर हुआ तो नियुक्ति भी उसी पद पर होनी चाहिए: कोर्ट

मुंबई : (Mumbai) बॉम्बे हाई कोर्ट (Bombay High Court) ने कहा है कि जब किसी अभ्यर्थी का चयन सहायक अध्यापक पद पर किया गया हो, तो उसकी नियुक्ति भी उसी पद पर की जानी चाहिए। सहायक अध्यापकों को ‘शिक्षण सेवक’ (Assistant Teachers as “Shikshan Sevaks”) के रूप में नियुक्त करना गलत और कानून के विपरीत है।

पीसीएमसी को 51 शिक्षकों की नियुक्ति बदलने का आदेश

अदालत ने पुणे की पीसीएमसी को निर्देश दिया है कि वह अपने माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत 51 शिक्षकों (Pune PCMC to appoint 51 teachers working in its secondary schools to the post of Assistant Teacher) को सहायक अध्यापक पद पर उसी वेतनमान में नियुक्त करे।

मेरिट लिस्ट में सहायक अध्यापक पद दर्ज था

न्यायमूर्ति रविंद्र वी. घुगे और न्यायमूर्ति अभय जे. मंत्री (Justices Ravindra V. Ghuge and Abhay J. Mantri) की पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ताओं का चयन सहायक अध्यापक (अनुदान रहित) पद के लिए हुआ था। मेरिट सूची में उनका पद और वेतनमान ₹38,600 से ₹1,22,800 तक स्पष्ट रूप से दर्शाया गया था।

शिक्षण सेवक योजना इस मामले में लागू नहीं

कोर्ट ने कहा कि शिक्षण सेवक योजना (Shikshan Sevak Scheme) केवल 100 प्रतिशत अनुदानित विद्यालयों पर लागू होती है, जबकि यह मामला अनुदान रहित विद्यालयों से संबंधित है। ऐसे में नियुक्ति आदेश में शिक्षकों को शिक्षण सेवक बनाना तर्कहीन और अनुचित है।

एरियर भुगतान और ब्याज का निर्देश

पीठ ने पीसीएमसी को (bench directed the PCMC) 10 कार्य दिवसों में पुराने आदेश वापस लेकर नए नियुक्ति आदेश जारी करने को कहा है। साथ ही 21 जून 2024 से वेतन अंतर 45 दिनों में चुकाने का आदेश दिया गया है। देरी होने पर 5 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज देना होगा और पहले दिए गए ₹18,000 प्रतिमाह मानधन को समायोजित किया जाएगा।

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