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Rajya Sabha Elections : 7 सीटों के लिए सियासी बिसात बिछी

Rajya Sabha Elections: The political chessboard is set for 7 seats

सियासी ‘जंग’ में कूदी कांग्रेस, ठोंका दावा
मुंबई : (Mumbai)
महाराष्ट्र की 7 राज्यसभा सीटों के लिए सियासी बिसात बिछ चुकी है, लेकिन महाविकास आघाड़ी (Maha Vikas Aghadi) (MVA) के लिए गणित काफी टेढ़ा है। शिवसेना (UBT), कांग्रेस और एनसीपी (SP) के पास कुल मिलाकर केवल 46 विधायक हैं, जो केवल एक उम्मीदवार को राज्यसभा भेजने के लिए काफी हैं। अब मुसीबत यह है कि इस इकलौती सीट पर गठबंधन के तीनों बड़े खिलाड़ी अपनी दावेदारी जता रहे हैं, जिससे ‘दोस्ती’ में दरार के संकेत मिलने लगे हैं।

शरद पवार और आदित्य ठाकरे की रेस
एनसीपी (Sharadchandra Pawar) की ओर से मांग उठ रही है कि उनके सबसे बड़े नेता शरद पवार को ही वरिष्ठता के आधार पर दोबारा राज्यसभा भेजा जाए। वहीं, चर्चा है कि उद्धव गुट की ओर से आदित्य ठाकरे (Aditya Thackeray) के नाम पर भी विचार चल रहा है। दोनों ही पार्टियां चाहती हैं कि उनका प्रतिनिधि दिल्ली की संसद में पहुंचे, लेकिन कांग्रेस की नई मांग ने इस रेस को और पेचीदा बना दिया है।

कांग्रेस का ‘नेशनल पार्टी’ वाला दांव
जब शरद पवार और शिवसेना (Sharad Pawar and Shiv Sena) के बीच खींचतान चल रही थी, तभी कांग्रेस विधायक दल के नेता विजय वडेट्टीवार ने यह कहकर सबको चौंका दिया कि यह सीट कांग्रेस को मिलनी चाहिए। उनका तर्क है कि चूंकि कांग्रेस एक राष्ट्रीय पार्टी है, इसलिए राज्यसभा में उसका प्रतिनिधित्व होना ज्यादा जरूरी है। उन्होंने साफ कर दिया है कि कांग्रेस इस सीट को लेकर अपनी दिलचस्पी दिखा चुकी है और इस पर अब तीनों पार्टियों को गंभीरता से विचार करना होगा।

5 मार्च तक का ‘सस्पेंस’
राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख 5 मार्च है। वडेट्टीवार ने हालांकि यह भरोसा जताया है कि सीट बंटवारे का मुद्दा बातचीत से सुलझा लिया जाएगा और तीनों पार्टियां मिलकर चुनाव लड़ेंगी। लेकिन अंदरखाने की खबर यह है कि तीनों ही दल पीछे हटने के मूड में नहीं दिख रहे हैं। ऐसे में देखना होगा कि ‘सम्मानजनक बातचीत’ के नाम पर कौन अपनी दावेदारी की कुर्बानी देता है।

विपक्षी एकजुटता की ‘अग्निपरीक्षा’
यह चुनाव केवल राज्यसभा की एक सीट (Rajya Sabha seat) का नहीं है, बल्कि आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनावों के लिए महाविकास आघाड़ी की मजबूती का टेस्ट भी है। अगर तीनों दल एक नाम पर सहमत नहीं हुए, तो गठबंधन की एकता पर सवाल उठेंगे और इसका सीधा फायदा सत्ताधारी महायुति को मिल सकता है। अब सबकी नजरें इस बात पर हैं कि क्या कांग्रेस अपना दावा छोड़ेगी या शरद पवार और उद्धव ठाकरे (Sharad Pawar and Uddhav Thackeray) कोई नया ‘फॉर्मूला’ निकालेंगे।

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