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New Delhi : थोक मुद्रास्फीति 1.81% पर, तीन माह से जारी है बढ़त

नई दिल्ली : (New Delhi) देश में मूल्य दबाव थमने के संकेत नहीं मिल रहे हैं। खुदरा महंगाई के बाद अब थोक स्तर पर भी कीमतों में लगातार तीसरे महीने तेजी दर्ज की गई है। जनवरी में थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) (Wholesale Price Index) आधारित मुद्रास्फीति बढ़कर 1.81 प्रतिशत हो गई, जो दिसंबर के 0.83 प्रतिशत से उल्लेखनीय रूप से अधिक है। यह बीते नौ महीनों का उच्चतम स्तर है।

विश्लेषकों का मानना है कि यदि कच्चे माल और धातुओं की कीमतों में तेजी बनी रहती है, तो आने वाले महीनों में थोक महंगाई का दबाव उपभोक्ता स्तर तक भी स्थानांतरित हो सकता है।

बीते साल 2.51% थी मुद्रास्फीति दर

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय (Ministry of Commerce and Industry) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2025 में डब्ल्यूपीआई महंगाई दर 1.81 प्रतिशत रही, जबकि एक वर्ष पूर्व इसी महीने यह 2.51 प्रतिशत दर्ज की गई थी। मासिक आधार पर आई इस तेजी के पीछे खाद्य वस्तुओं, गैर-खाद्य कच्चे माल और विनिर्मित उत्पादों की कीमतों में वृद्धि प्रमुख कारक रही।

लागत बढ़ने से मूल्य पर बढ़ा दबाव

मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि बेसिक मेटल, अन्य विनिर्माण उत्पाद, गैर-खाद्य वस्तुएं, खाद्य पदार्थ और वस्त्र श्रेणी में कीमतों के उछाल ने थोक महंगाई को ऊपर धकेला। विशेष रूप से धातुओं और औद्योगिक इनपुट की लागत बढ़ने से उत्पादक स्तर पर मूल्य दबाव बढ़ा है।

खाद्य वस्तुओं, कीमती धातुओं का असर

इससे पहले उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित खुदरा महंगाई (Consumer Price Index) दर भी जनवरी में बढ़कर 2.75 प्रतिशत पर पहुंच चुकी है। खुदरा स्तर पर खाद्य वस्तुओं और कीमती धातुओं की कीमतों में वृद्धि इसका प्रमुख कारण रही। उल्लेखनीय है कि ये आंकड़े संशोधित आधार वर्ष 2024 पर आधारित नए सीपीआई श्रृंखला के तहत जारी किए गए पहले आधिकारिक आंकड़े हैं।

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