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Balrampur : ओरंगा गांव में टीबी का कहर, छह साल में 35 मरीज मिले, कई दोबारा हुए पीड़ित

हालात का पता लगाने 900 की आबादी वाले गांव में डोर-टू-डोर सर्वे होगा
बलरामपुर : (Balrampur)
जिले के ओरंगा गांव में टीबी से एक युवती की मौत के बाद हड़कंप मच गया है। गांव की आबादी करीब 900 है। इस गांव में टीबी के मरीजों की संख्या चिंताजनक रूप से बढ़ रही है। 2018 से लेकर अब तक लगभग 35 लोग टीबी की चपेट में आ चुके हैं। हालात गंभीर हैं।

सीएमएचओ डॉ. बसंत सिंह (CMHO Dr. Basant Singh) ने आज रविवार को बताया कि सभी मरीजों का इलाज हुआ था, लेकिन कुछ लोगों में बीमारी दोबारा लौट आई। हालात को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग गांव में डोर-टू-डोर सर्वे करेगा, ताकि स्थिति की पता चल सके। एक सप्ताह में पूरे गांव की जांच की जाएगी। वहीं मेडिकल कॉलेज से भी एक टीम बुलाई गई है। यह टीम पता लगाएगी कि इतने लोग क्यों संक्रमित हो रहे हैं। एक सप्ताह में सभी ग्रामीणों की जांच कर ली जाएगी।

युवती की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम (health department team) गांव में टीबी बीमारी से पीड़ित लोगों का पता लगा रही है। इस दौरान एक महिला गंभीर हालत में मिली, जिसे रामानुजगंज अस्पताल में भर्ती किया गया है।

टीबी का बढ़ता खतरा रोजगार की भी समस्या

गांव में रोजगार की कमी के कारण पलायन की समस्या भी विकराल है। स्थानीय लोग अपनी आजीविका के लिए मजबूरन बाहर जाकर जोखिम भरे काम करते हैं, जिससे उनकी सेहत पर गंभीर असर पड़ रहा है। ओरंगा के ग्रामीण भी इस स्थिति से दुखी हैं। उनका मानना है कि अगर गांव में रोजगार के बेहतर अवसर मिले और योजनाओं का लाभ पहुंचाया जाए तो लोग बाहर नहीं जाएंगे।

लोग मजबूरी में बाहर जाकर जोखिम भरे काम करते हैं। इससे उनकी सेहत पर असर पड़ता है। पंडो समाज के प्रदेश अध्यक्ष उदय पंडो ने स्वास्थ्य विभाग पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि विभाग अपनी कमियों को छिपा रहा है। सरकार पंडो जनजाति के लिए 11 योजनाएं चला रही है, लेकिन गांव में इनका असर नहीं दिख रहा। मनरेगा के काम मशीनों से हो रहे हैं। रोजगार कुछ ही लोगों को मिल रहा है।

जागरूकता अभियान पर दिया जा रहा जोर

टीबी से होने वाली मौतों को रोकने गांव में जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा। लोगों को इस बीमारी के लक्षण, बचाव के तरीके और इलाज के महत्व के बारे में समझाया जाएगा, ताकि कोई भी मरीज बिना इलाज के बीमारी को बढ़ावा न दे सकें। स्वास्थ्य विभाग की टीम लोगों को टीबी के खिलाफ खुद को सुरक्षित रखने और समय-समय पर जांच कराने के लिए प्रेरित करेगी।

पानी की गुणवत्ता की भी जांच की जाएगी

स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि गांव में पानी और सफाई की स्थिति भी बीमारी फैलने का कारण हो सकती है। गंदा पानी संक्रमण फैलाता है। इससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता घटती है। ऐसे में टीबी जैसी बीमारी का खतरा बढ़ जाता है। गांव में जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को टीबी के लक्षण, बचाव और इलाज की जानकारी दी जाएगी। टीम लोगों को समय-समय पर जांच कराने और इलाज पूरा कराने के लिए प्रेरित करेगी।

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