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East Medinipur : सैटेलाइट तकनीक से मछुआरों को मिलेगी सुरक्षा, राज्य मत्स्य विभाग की नई पहल

पूर्व मेदिनीपुर : (East Medinipur) गहरे समुद्र में मछली पकड़ने जाने वाले मछुआरों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए राज्य मत्स्य विभाग ने अत्याधुनिक सैटेलाइट तकनीक के इस्तेमाल की दिशा में कदम बढ़ाया है। अब सैटेलाइट नियंत्रित ‘टू-वे एमएसएस ट्रांसपोंडर’ डिवाइस मछुआरों को न केवल समुद्र में मछलियों की स्थिति की जानकारी देगा, बल्कि किसी भी आपदा की स्थिति में पहले से अलर्ट भी करेगा।

पूर्व मेदिनीपुर जिले के 200 और दक्षिण 24 परगना जिले के 300 ट्रॉलरों पर यह उपकरण परीक्षण के तौर पर लगाया जा रहा है। अभी तक मछुआरे वायरलेस तकनीक के सहारे संपर्क करते थे, लेकिन तूफान या समुद्री संकट के दौरान यह संपर्क पूरी तरह टूट जाता था, जिससे जानमाल का नुकसान होता था।
अब इस नई प्रणाली से न केवल ट्रॉलर की सटीक स्थिति की जानकारी मिलेगी, बल्कि मौसम की स्थिति, मछलियों की अधिकता वाले क्षेत्रों और प्रतिबंधित अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा के पास पहुंचने से पहले चेतावनी भी प्राप्त होगी। यह उपकरण भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) द्वारा तैयार किया गया है और ‘जीसैट-6’ सैटेलाइट के जरिए कार्य करता है।

मत्स्य विभाग के कांथी कार्यालय के सह-निदेशक सुमन साहा के अनुसार, “यह डिवाइस मछुआरों को तूफान के बारे में पहले ही आगाह करता है, मछलियों की स्थिति बताता है और समुद्री कछुए जैसे संरक्षित जीवों के स्थान की जानकारी भी देता है, जिससे अनजाने में उनके शिकार से बचा जा सके।”
ट्रॉलर मालिकों को भी यह डिवाइस काफी उपयोगी लग रहा है। शंकरपुर फिशरमैन एंड फिश ट्रेडर्स एसोसिएशन के सदस्य आशीष भांज ने बताया कि शंकरपुर में 40 ट्रॉलरों पर यह डिवाइस लगाया जा चुका है और इससे मछुआरों की सुरक्षा को लेकर हमें काफी उम्मीदें हैं। वहीं ट्रॉलर मालिक कमल राय ने कहा कि इस तकनीक से सभी मछुआरे लाभान्वित होंगे।

इस डिवाइस से एक खास मोबाइल ऐप के माध्यम से मछुआरों को जानकारी भेजी जाएगी, जो समुद्र में होने पर भी कार्य करेगा। इस परियोजना को केंद्र और राज्य सरकार मिलकर चला रही हैं और डिवाइस निशुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है।
यह पहल समुद्री मछुआरों के जीवन को अधिक सुरक्षित और तकनीकी रूप से समर्थ बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

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