नई दिल्ली : (New Delhi) सुप्रीम कोर्ट ने शिवसेना के उद्धव ठाकरे गुट की ओर से चुनाव चिन्ह पर निर्वाचन आयोग के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर जल्द सुनवाई से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि इस याचिका पर ग्रीष्मावकाश के बाद ही सुनवाई हो सकती है, अगर ज्यादा जरुरत होगी तो ग्रीष्मावकाश के दौरान सुनवाई कर सकते हैं।
आज उद्धव गुट की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच के समक्ष मेंशन करते हुए कहा कि कोर्ट ने महाराट्र में 2023 से पहले की आरक्षण नीति के मुताबिक स्थानीय निकायों के चुनाव कराये जाने का आदेश दिया है। इसलिए उद्धव गुट की याचिका पर तत्काल सुनवाई होनी चाहिए। तब कोर्ट ने सिब्बल से पूछा कि तुरंत सुनवाई की क्या जरुरत है। यह स्थानीय निकाय चुनाव हैं। यह जरुरी नहीं है कि आप राजनीतिक प्रतीक वाले चुनाव चिन्ह पर ही चुनाव लड़ेंगे।
उद्धव ठाकरे गुट ने निर्वाचन आयोग के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें शिंदे गुट को असली शिवसेना के रूप में मान्यता दी गई है। याचिका में शिंदे गुट को धनुष बाण चुनाव चिन्ह आवंटित करने के निर्वाचन आयोग के फैसले को चुनौती दी गई है।
निर्वाचन आयोग ने 17 फरवरी, 2023 को एकनाथ शिंदे गुट को असली शिवसेना करार देकर धनुष बाण चुनाव चिन्ह आवंटित कर दिया। आयोग ने पाया था कि शिवसेना का मौजूदा संविधान अलोकतांत्रिक है। निर्वाचन आयोग ने कहा था कि शिवसेना के मूल संविधान में अलोकतांत्रिक तरीकों को गुपचुप तरीके से वापस लाया गया, जिससे पार्टी निजी जागीर के समान हो गई। इन तरीकों को निर्वाचन आयोग 1999 में नामंजूर कर चुका था। पार्टी की ऐसी संरचना भरोसा जगाने में नाकाम रहती है। निर्वाचन आयोग के इस आदेश के खिलाफ उद्धव ठाकरे गुट ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। धनुष बाण चुनाव चिन्ह बाल ठाकरे के समय से शिवसेना का चुनाव चिन्ह रहा है।


