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New Delhi : हिन्दी के साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल को मिलेगा ज्ञानपीठ पुरस्कार

नई दिल्ली : (New Delhi) छत्तीसगढ़ के प्रख्यात हिन्दी साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल को भारतीय साहित्य के सर्वोच्च सम्मान ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। शुक्ल छत्तीसगढ़ के पहले लेखक हैं जिन्हें यह पुरस्कार प्रदान किया जाएगा।

भारतीय ज्ञानपीठ के महाप्रबंधक आरएन तिवारी ने शनिवार को एक बयान में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह पुरस्कार भारतीय भाषाओं में उत्कृष्ट साहित्य रचने वाले रचनाकारों को प्रदान किया जाता है। इस सम्मान के अंतर्गत 11 लाख रुपये की राशि, वाग्देवी की कांस्य प्रतिमा और प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाता है।

उन्होंने बताया कि सुप्रसिद्ध कथाकार और ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित प्रतिभा राय की अध्यक्षता में नई दिल्ली में हुई प्रवर परिषद की बैठक में निर्णय लिया गया कि वर्ष 2014 के लिए 59वां जानपीठ पुरस्कार प्रतिष्ठित हिंदी साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल को प्रदान किया जाएगा। बैठक में चयन समिति के अन्य सदस्य माधव कौशिक, दामोदर मावजी, प्रभा वर्मा, डॉ अनामिका, डॉ. ए. कृष्णा राव, प्रफ्फुल शिलेदार, डॉ जानकी प्रसाद शर्मा और जानपीठ के निदेशक मधुसूदन आनन्द शामिल थे। यह सम्मान उन्हें हिंदी साहित्य में उनके अद्वितीय योगदान, सृजनात्मकता और विशिष्ट लेखन शैली के लिए प्रदान किया जा रहा है। यह हिन्दी के 12वें साहित्यकार है जिन्हें यह पुरस्कार प्रदान किया जा रहा है।

विनोद कुमार शुक्ल (जन्म । जनवरी 1937) हिंदी शाहित्य के एक प्रतिष्ठित लेखक, कवि और उपन्यासकार हैं। उनका लेखन सरल भाषा, गहरी संवेदनशीलता और अद्वितीय शैली के लिए जाना जाता है। वे मुख्य रूप से आधुनिक हिंदी साहित्य में प्रयोगधमी लेखन के लिए प्रसिद्ध हैं। विनोद कुमार शुक्ल की पहली कविता पुस्तिका वर्ष 1971 में लगभग जयहिंद’ शीर्षक से प्रकाशित हुई थी। उनके प्रमुख उपन्यासों में नौकर की कमीज, दीवार में एक खिड़की रहती थी, और खिलेगा तो देखेंगे शामिल है। उनकी कविताएं और कहानियां आम जीवन की बारीकियों को सहज भाषा में प्रस्तुत करती हैं। उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार और अन्य प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा गया है। उनका लेखन आम आदमी की भावनाओं, उसकी रोजमर्रा की जिंदगी और समाज की जटिलताओं को खूबसूरती से व्यक्त करता है।

हिंदी साहित्य प्रेमियों और सपूर्ण साहित्य जगत के लिए यह हर्ष और गर्व का विषय है कि विनोद कुमार शुक्ल को यह सम्मान प्रदान किया जा रहा है। यह पुरस्कार उनकी साहित्यिक साधना और सृजनशीलता का सम्मान है जिससे हिंदी साहित्य को नई ऊंचाइयां मिली है।

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