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Bilaspur : शराब दुकान से लोगों को हो रही परेशानी पर हाइकोर्ट सख्त, कहा इसे हटाएं, केवल राजस्व कमाना सही नहीं

बिलासपुर :(Bilaspur) छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में बिलासपुर के सिरगिट्टी तारबाहर की शराब दुकान के कारण महिलाओं और लोगों को हो रही परेशानी को लेकर जनहित याचिका पर गुरुवार को सुनवाई हुई है। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस रमेश कुमार सिन्हा ने नाराजगी जाहिर करते हुए टिप्पणी की है कि इसे हटा क्यों नहीं देते..? वहीं समय में बदलाव करने और दूसरी जगह शिफ्ट करने की बात भी कही है। इसके साथ ही नगर निगम आयुक्त को रोजाना शाम एक बार उस जगह का निरीक्षण करने का आदेश दिया है। दरअसल गुरुवार को इस पूरे मामले में मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायाधीश रविन्द्र कुमार अग्रवाल की बैंच में सुनवाई हुई। 28 जनवरी 2025 के आदेश के परिपालन में छत्तीसगढ़ आबकारी विभाग के सचिव ने शपथपत्र पेश किया। वहीं कोर्ट ने कहा क‍ि हम एक महीने बाद तक स्थिति पर नजर रखेंगे। ताकि उस क्षेत्र से गुजरने वाले आम लोगों को किसी प्रकार की कठिनाई या असुविधा न हो।

वहीं बिलासपुर कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को यह भी सुनिश्चित करने के लिए उपयुक्त बल का प्रयोग करने कहा है, जिससे किसी भी आम जनता को कोई परेशानी न हो। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने नगर निगम आयुक्त बिलासपुर को व्यक्तिगत शपथपत्र में जवाब मांगा है। वहीं अगली सुनवाई 28 फरवरी 2025 को होगी।

दरअसल 28 जनवरी 2025 को मीडिया रिपोर्ट में सिरगिट्टी मुख्य मार्ग पर शराब दुकान बनी जी का का जंजाल और यातायात नगर के एप्रोच रोड से हटाई गई शराब दुकान का सबब बन गई है। एक ओर उक्त शराब भट्टी सरकारी नियमों की धज्जियां उड़ाकर चलाई जा रही है, क्योंकि उक्त भट्ठी अंडर ब्रिज के पास स्थित है और शाम के समय वहां शराबियों का जमावड़ा लगा रहता है, जिससे वहां से आने-जाने वाले लोगों सहित महिलाओं को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। वहीं तारबाहर अंडर ब्रिज के किनारे स्थित देशी व अंग्रेजी शराब भट्ठी से लोगों को काफी परेशानी हो रही है। खासकर महिलाओं को काफी परेशानी हो रही है, क्योंकि कई बार शराब के नशे में धुत कुछ लोग महिलाओं से अभद्र व्यवहार करते नजर आते हैं और कई बार विवाद की स्थिति भी उत्पन्न हो जाती है।

वहीं दूसरी समस्या को चिन्हांकित किया गया था कि शराबी मुख्य सड़क पर अपनी मोटरसाइकिल खड़ी कर देते हैं, जिससे सड़क पर प्रतिदिन जाम की स्थिति बन रही है। इसे देखते हुए कोर्ट ने सचिव, आबकारी विभाग, छत्तीसगढ़ शासन को व्यक्तिगत शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया था।

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