कानपुर : ओस्टियो पेरिस यानी हड्डियों के बोन मास में आई कमी से हड्डियां नाजुक और कमजोर हो जाती हैं। थोड़े से भी खिंचाव या भार से फ्रैक्चर होने की संभावना बनी रहती है। यह समस्या प्रौढ़ अवस्था में खासतौर पर रजोनिवृत्ति के बाद बहुत आम है। यह बातें ‘विश्व ऑस्टियोपोरोसिस डे’ के मौके पर मेनोपॉज सोसाइटी कानपुर ऑब्स एंड गायनी सोसाइटी तथा क्लब कानपुर के तत्वाधान में आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ.मीरा अग्निहोत्री ने कही।
उन्होंने कहा कि देश के प्रधानमंत्री और प्रदेश के मुख्यमंत्री नारी शक्ति को आगे ले जाने पर जो दे रहे हैं तो हम सभी महिलाओं को चाहिए के अपने शरीर के प्रति ध्यान दें। मानव जीवन में यदि कोई सबसे अधिक साथ देता है तो वह शरीर है। इस लिए घरेलू एवं कामकाजी महिलाओं को समय-समय पर बोन जांच अवश्य करा ले, ताकि उन्हें आने वाले खतरों से बचने का उपाय मिल जाए और वह समय से अपना उपचार करा ले।
इस मौके पर डॉ. किरन पांडेय ने सभी प्रतिभागियों को बताया कि रजोनिवृत्ति के समय होने वाले शारीरिक बदलाव तथा ओस्टियोपोरोसिस एवं अन्य समस्याओं, उनके बचाव व निदान कैसे करना चाहिए।
डॉ. कौस्तुभ श्रीवास्तव ने मेनोपॉज के समय लिए जाने वाले कैल्शियम युक्त पौष्टिक आहार पर प्रकाश डालते हुए कहा कि महिलाओं को कैल्शियम युक्त आहार का प्रयोग अधिक करना चाहिए। इसी क्रम में डॉ.पाविका लाल ने बताया कि रजोनिवृत्ति के समय किस तरह के व्यायाम करना चाहिए। कार्यक्रम के अंत में डॉ. रेनू टंडन ने बताया कि केएमएस द्वारा विश्व ऑस्टियोपोरोसिस दिवस पर पब्लिक फोरम के आयोजन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और हड्डियों में कैल्शियम स्तर की जांच का भी लाभ उठाया। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से डॉ. रेशमा निगम, डॉ.गरिमा गुप्ता, डॉ. किरण सिन्हा, डॉ.सीमा द्विवेदी, डॉ.रेखा गुप्ता, डॉ.कंचन लता सहित कई चिकित्सक और अन्य महिलाएं उपस्थित रही।


