यूसीसी के लिए डेढ़ साल में 02 लाख से भी ज्यादा लोगों के आए सुझाव
उत्तराखण्ड गौरव सम्मान से 09 साहित्यकारों को किया गया सम्मानित
देहरादून : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखण्ड साहित्य गौरव सम्मान कार्यक्रम में कहा कि भाषा संस्थान की विकास को लेकन स्वायत्तता को सरकार बरकार रखेगी, जो समाज अपनी भाषा और बोलियों का सम्मान नहीं करता वह अपनी प्रतिष्ठा खो देता है।
शुक्रवार की शाम सर्वे चौक स्थित आईआरडीटी सभागार में मुख्यमंत्री धामी ने उत्तराखण्ड भाषा संस्थान की ओर से आयोजित साहित्य गौरव सम्मान समारोह और लोक भाषा सम्मेलन में 09 साहित्यकारों को प्रतिष्ठित उत्तराखण्ड गौरव सम्मान से सम्मानित किया। सभी सम्मानित साहित्यकारों को अंगवस्त्र प्रशस्ति पत्र एवं एक लाख की सम्मान राशि प्रदान की गई।
इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के अनेक साहित्यकारों ने हिन्दी को विश्व पटल पर स्थापित करने में महान योगदान दिया है। हिन्दी एक उदार, ग्रहणशील और सहिष्णु भाषा तो है ही, ये भारत की राष्ट्रीय चेतना की संवाहिका भी है। यह हमारी परंपराओं और हमारी विरासत का बोध कराने वाला एक सतत अनुष्ठान है।उत्तराखण्ड जैसे पर्वतीय प्रदेश में हिन्दी के साथ ही गढ़वाली, कुमाउनी, जौनसारी आदि बोलियों का भी विकास होगा। साहित्य गौरव सम्मान पाने वाले साहित्यकारों में वे साहित्यकार भी शामिल हैं, जो अनेक विशिष्ट बोलियों में रचना कर्म कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में इस दिशा में प्रभावी प्रयास किये जा रहे हैं। आज आधिकारिक मंचों से लेकर शिक्षा तक में हिन्दी को अभूतपूर्व स्थान दिया जा रहा है। मेडिकल और इंजिनयरिंग जैसे विषयों की पढ़ाई अब हिन्दी में होना कोई स्वप्न नहीं है जबकि कुछ वर्ष पूर्व तक ये महज एक कल्पना थी। हिन्दी के गौरव को बनाए रखना हम सभी का दायित्व है ।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड शैक्षिक व सांस्कृतिक रूप से प्रबुद्ध लोगों की भूमि है। उत्तराखण्ड की जनता ने किसी राजनैतिक दल को लगातार दूसरी बार सरकार बनाने का अवसर प्रदान कर,इस पर 2022 में अपनी मुहर लगाई। समान नागरिक संहिता लागू करने के लिये गठित समिति डेढ़ साल में 02 लाख से भी ज्यादा लोगों के सुझाव विचार लिये।देश में एक विधान एक निशान एक प्रधान के साथ एक कानून की दिशा में हम आगे बढेंगे। इस दिशा में देश के अन्य राज्य भी आगे आयेंगे।
समान नागरिक संहिता लागू करने के लिये गठित समिति की ओर से डेढ़ साल में 02 लाख से भी ज्यादा लोगों के लिये सुझाव और विचार लिये गये। समान नागरिक संहिता का ड्राफ्ट मिलते ही उसे देवभूमि में लागू किया जाएगा
उन्होंने कहा कि सम्मानित हुए साहित्यकार अपनी साहित्यिक कृतियों से हमारी लोक भाषा का मान सम्मान बढ़ाते रहेंगे। आगामी वर्षों में भाषा संस्थान अपनी साहित्यिक एवं भाषाई गतिविधियों को व्यापक स्तर प्रदान करेगा।
अब सरकार ने हिन्दी अकादमी, पंजाबी अकादमी, उर्दू अकादमी और लोक भाषा बोली अकादमी को एक छत के नीचे लाते हुए उत्तराखण्ड भाषा संस्थान को पुर्नगठित किया है। हमारी सरकार भाषा संस्थान की स्वायत्तता को बरकरार रखते हुए इसके विकास के लिए हर सम्भव कार्य करेगी। उन्होंने साहित्यकारों, भाषाविदों, शोधार्थियों से अनुरोध किया कि वे भाषा संस्थान के साथ मिलकर भाषाई विकास के लिए कार्य करें।
इन्हें मिला उत्तराखण्ड साहित्य गौरव सम्मानः संतोष कुमार निवारी को चन्द्रकुंवर बर्त्वाल पुरस्कार, अमृता पाण्डे को शैलेश मटियानी पुरस्कार, प्रकाश चन्द्र तिवारी को डॉ. पीताम्बर दत्त बड़थ्वाल पुरस्कार, दामोदर जोशी देवांशु को भैरव दत्त धूलिया पुरस्कार, राजेन्द्र सिंह बोरा उर्फ त्रिभुवन गिरी को गुमानी पंत पुरस्कार, नरेन्द्र कठैत को भजन सिंह सिंह पुरस्कार, महावीर रवांल्टा को गोविन्द चातक पुरस्कार, गुरूदीप को सरदार पूर्ण सिंह पुरस्कार एवं राजेश आनन्द असीर को प्रो. उन्नवान चिश्ती पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
राज्य की समृद्ध भाषा बोलियों को स्थान मिलने के लिए किये जाएंगे प्रयास: भाषा मंत्री
विभागीय मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि संविधान की आठवीं सूची में राज्य की समृद्ध भाषा बोलियों को स्थान मिले इसके भी प्रयास किये जायेंगे। उत्तराखण्ड भाषा संस्थान नये प्रयोग एवं सुधारात्मक प्रयासों से विभिन्न भाषाओं के साहित्यकारों को आगे बढ़ाने का प्रयास करेगा। अपनी भाषा बोली एवं संस्कृति को जिन्दा रखना बड़ी बात है।
भाषा के कारण ही हमारा अस्तित्व हैः प्रो. गिरीश्वर मिश्र
अन्तरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय वर्धा के पूर्व कुलपति प्रो. गिरीश्वर मिश्र ने कहा कि भाषा के कारण ही हमारा अस्तित्व है। भाषा का हमारे जीवन में दखल रहता है। जीवन का स्पंदन है भाषा। उन्होंने उत्तराखण्ड साहित्य गौरव सम्मान की पहल की सराहना करते हुये इसे भाषा एवं साहित्य सृजन को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ी पहल बताया। प्रो. मिश्र ने उत्तराखण्ड में समान नागरिक संहिता कानून बनाये जाने के लिये मुख्यमंत्री के प्रयासों की सराहना करते हुये इसे सबको साथ लेकर चलने की पहल बताया।
मनुष्य अकेली प्रजाति है जो कल्पना कर सकती है: अनिल रतूड़ी
साहित्यकार एवं पूर्व पुलिस महानिदेशक अनिल रतूड़ी ने कहा कि मनुष्य और जीवों में शब्द का ही अंतर है। मनुष्य अकेली प्रजाति है जो कल्पना कर सकती है। उन्होंने कहा कि कुमाउं एवं गढ़वाल राजवंशों द्वारा अपने शासनकाल में कुमाऊंनी एवं गढ़वाली को अपनी राजभाषा बनाया गया था। इसके कई प्रमाण मिलते हैं।
उत्तराखण्ड भाषा संस्थान की निदेशक स्वाति एस. भदौरिया,विधायक खजान दास ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम में विधायक मोहन सिंह बिष्ट, प्रमोद नैनवाल, सचिव भाषा विनोद प्रसाद रतूडी सहित बडी संख्या में साहित्यकार एवं गणमान्य लोग उपस्थित थे। संचालन साहित्यकार गणेश खुगशाल गणी ने किया।


