
मुंबई: दिग्गज सोशल एक्टिविस्ट अन्ना हजारे ने अपने गांव रालेगण सिद्धि में अपनी जीवनी ‘जननायक अन्ना हजारे’ का लोकार्पण करते हुए कहा्, ‘देश के भविष्य के लिए आंदोलन बहुत जरूरी हैं। गांधी जी ने आंदोलन के जरिए आजादी दिलाकर जो राह दिखाई थी, उसे हमें भूलना नहीं चाहिए।’
आजकल जन-आंदोलनों में कमी पर चिंता जताते हुए अन्ना ने कहा, ‘आम जन केवल खुद का हित देखने लगे हैं। नेतृत्व भी आगे नहीं आ रहा है। जरूरत पड़ने पर स्वत: स्फूर्त आंदोलन के लिए जनता में जागृति पैदा करनी होगी। अधिकार का महत्व समझाना होगा। अधिकार लेने के लिए आवाज उठाना जारी रखना भी सिखाना होगा।’
अन्ना ने जोर देकर कहा, ‘भ्रष्टाचार पर भी अंदोलनों से ही अंकुश लगाया जा सकता है। हमने महाराष्ट्र में हर भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन किए। दस मजबूत कानून बनवाए। आरटीआई जैसा कानून साकार कराया। इससे भ्रष्टाचार पर काफी हद तक रोक लगी।’
इस मौके पर इस पुस्तक के लेखकों रमेश निर्मल और भुवेन्द्र त्यागी और सतलुज प्रकाशन के देश निर्मोही ने अन्ना से समाज से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर लंबी बातचीत की। अन्ना ने कहा, ‘गांधीजी ने मंत्र दिया था कि देश का विकास करना है, तो गांवों का विकास करना होगा। हमने उस मंत्र को भुला दिया। हमने लगातार शहरों का विकास किया, जो संसाधनों का दोहन करके ही संभव था। गांवों का विकास बिना संसाधनों का दोहन किए होता है। इससे न केवल नए संसाधन पैदा होते हैं, बल्कि विकास का लाभ ज्यादा लोगों तक पहुंचता है और शहरों पर बोझ घटता है। हमें इस दिशा में गंभीरता से सोचना होगा।’


