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Bengaluru: तेल, गैस उत्पादन में गिरावट के रुख को पलटेगी ओएनजीसी, नई खोजों में करेगी अरबों डॉलर का निवेश

बेंगलुरु: (Bengaluru) देश की सबसे बड़ी तेल एवं गैस उत्पादक कंपनी ऑयल एंड नैचुरल गैस कॉरपोरेशन (ONGC) इस साल उत्पादन में गिरावट के बरसों से जारी रुख को पलटेगी और उसके बाद धीरे-धीरे उत्पादन बढ़ाएगी। कंपनी के एक शीर्ष अधिकारी ने यह जानकारी देते हुए कहा कि ओएनजीसी नई खोजों से उत्पादन शुरू करने के लिए अरबों डॉलर का निवेश कर रही है।

ओएनजीसी ने वित्त वर्ष 2021-22 में 2.17 करोड़ टन से अधिक कच्चे तेल का उत्पादन किया था। कच्चे तेल का शोधन कर इसे पेट्रोल और डीजल जैसे पेट्रोलियम उत्पादों में बदला जाता है। बीते वित्त वर्ष के दौरान कंपनी का प्राकृतिक गैस उत्पादन 21.68 अरब घनमीटर रहा। प्राकृतिक गैस का इस्तेमाल बिजली उत्पादन, उर्वरक विनिर्माण और वाहनों के लिए सीएनजी के रूप में किया जाता है।

ओएनजीसी के चेयरमैन अरुण कुमार सिंह ने पीटीआई-भाषा से कहा, ‘‘हम निश्चित तौर पर 2023-24 और यहां तक ​​कि चालू वर्ष में भी तेल एवं गैस उत्पादन में बढ़ोतरी की उम्मीद कर रहे हैं।’’

चालू वित्त वर्ष (2022-23) में कंपनी का कच्चे तेल का उत्पादन बढ़कर 2.28 करोड़ टन पर पहुंचने का अनुमान है। वहीं गैस का उत्पादन 22.09 अरब घनमीटर रहने का अनुमान है। अगले वित्त वर्ष में कच्चे तेल का उत्पादन 2.46 करोड़ टन और गैस उत्पादन 25.68 अरब घनमीटर रहने का अनुमान है।

ओएनजीसी का घरेलू उत्पादन में 71 प्रतिशत का हिस्सा है। एक दशक से अधिक से कंपनी के क्षेत्रों से उत्पादन में धीरे-धीरे कमी आ रही है। इसकी वजह यह है कि कंपनी के क्षेत्र काफी पुराने हो चुके हैं।

सरकार ने उत्पादन को बढ़ावा देने के प्रयास में ओएनजीसी के बड़े तेल और गैस क्षेत्रों को निजी और विदेशी कंपनियों को देने पर विचार किया था, लेकिन इस मामले में उसे आंतरिक विरोध का सामना करना पड़ा था। सिंह ने कहा कि कंपनी तकनीकी रूप से मुश्किल क्षेत्रों में भागीदारी के लिए तैयार है।

ओएनजीसी 20 प्रमुख परियोजनाओं में 59,000 करोड़ रुपये का निवेश कर रही है। इनमें गहरे समुद्र में केजी ब्लॉक केजी-डीडब्ल्यूएन-98/2 (केजी-डी5) में पाए गए तेल और गैस के भंडार को उत्पादन में लाना और मुंबई हाई फील्ड का चौथे चरण का पुनर्विकास शामिल है।

केजी-डी5 में निवेश से कंपनी अतिरिक्त उत्पादन हासिल कर पाएगी जबकि मुंबई हाई के पुनर्विकास पर निवेश से कंपनी पुराने पड़ चुके क्षेत्रों के उत्पादन में आ रही गिरावट को थाम सकेगी।

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