
दिन जब मुट्ठी खोलता है
तो केवल धूप नहीं निकलती
परिंदों की उड़ान, फूलों के रंग
और पर्वतों के साए भी
बाहर निकल आते हैं
निकलती रहे धूप
उड़ते रहें परिंदे
खिलते रहें रंग
और बने रहें पर्वतों के
धरती की दहलीज़ पर

दिन जब मुट्ठी खोलता है
तो केवल धूप नहीं निकलती
परिंदों की उड़ान, फूलों के रंग
और पर्वतों के साए भी
बाहर निकल आते हैं
निकलती रहे धूप
उड़ते रहें परिंदे
खिलते रहें रंग
और बने रहें पर्वतों के
धरती की दहलीज़ पर