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सरगोशियां: एक चोर दांतों वाली लड़की की याद

Sargoshiyan

हवा की सरगोशी की शक्ल में वक़्त का एक लम्हा मेरे कान के पास से गुज़रा। पैमाने में बस ज़रा सी वोदका और ज़रा सा पानी बचा हुआ था। मैंने उसे छत के बीच उछाल दिया। बरसात से पहले, हवा शायद इसे उड़ा ले जाएगी। साथ ही एक चोर दांतों वाली लड़की को याद करके मुसकुराना भी…

फिलहाल ऊपर देखो तो कुछ बरसे हुये बादल हैं जैसे रात की सलवटों से भरा लिहाफ़ आसमान में टंगा है।

पश्चिम से आती हवा से मुंह फेरते हुये उसने सुना।

क्या पत्थरों, ताबीजों और किताबों से ही मुकम्मल हो जाता है कोई? उस घड़ी, जब एक बार उसने बावजह छू जाने दिया था। उससे बड़ा सुकून का सबक कोई क्यों न रहा ज़िंदगी में। तुम्हें मालूम है खत्म कुछ नहीं होता। हम किसी फरवरी महीने की एक गुनगुनी नज़र को गरम दिनों की धूप में भी ज़िंदा कर सकते हैं। जैसे किसी ने हाथ आगे बढ़ा कर खींच लिया हो।

तुम कहाँ पड़े होते अगर उसने गले न लगाया होता। कि गले लगाने के लिए सचमुच का बाहों में भर लेना ज़रूरी नहीं होता। कई छोटे छोटे संदेशे ये काम बखूबी कर लेते हैं। जब आप पाएँ कि आप लगातार उसी तरफ देख रहे हैं, उसी को सोच रहे हैं और उसी से कोई ख़्वाहिश भी नहीं है तब आप उसके सच्चे प्रेम में होते हैं।

ये सब कौन किससे कह रहा था। हवा अब भी पश्चिम से ही आ रही है मगर दिखता कोई नहीं

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