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हम

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मुहब्बत गर नदी है तो किनारे हैं जी हम दोनों
बनो हिम्मत इक दूजे के सहारे हैं जी हम दोनों

भले हम मिल न पाएंगे रहेंगे साथ ही हरदम
हज़ारों जन्म इक ही संग गुज़ारे हैं जी हम दोनों

ये दुनिया चाहकर भी तो जुदा ना कर सके हमको
जो बुझ के बुझ न पाएंगे सितारे हैं जी हम दोनों

मुकम्मल ख़्वाब होंगे सब ये हमने सोच रक्खा है
यूं अपनी ज़िंदगी मिलकर संवारे हैं जी हम दोनों

फ़कत ये जिस्म ही नईं रूह भी तो ये तुम्हारी है
मोहब्बत में मेरी जानां तुम्हारे हैं जी हम दोनों

  • संदीप गांधी नेहाल

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