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Washington : ट्रंप का यूरोपीय देशों को कड़ा संदेश- नाटो ने ‘होर्मुज’ की सुरक्षा नहीं की तो भविष्य बहुत बुरा होगा

Washington: Trump’s Stern Message to European Nations—If NATO Fails to Secure the Strait of Hormuz, the Future Will Be Bleak

वाशिंगटन/टोक्यो : (Washington/Tokyo) अमेरिकी राष्ट्रपति राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अगर उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (North Atlantic Treaty Organization) (NATO) देश होर्मुज (Hormuz) जलडमरूमध्य को सुरक्षित करने में मदद नहीं करते तो उनका भविष्य बहुत बुरा होगा। ट्रंप ने इस रणनीतिक जलमार्ग को लेकर यूरोपीय देशों को एक कड़ा संदेश दिया।

सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने फाइनेंशियल टाइम्स (Financial Times) को रविवार को फोन पर दिए साक्षात्कार में कहा, “यह बिल्कुल सही है कि जो लोग इस जलडमरूमध्य से फायदा उठाते हैं, वे यह सुनिश्चित करने में मदद करें कि वहां कुछ भी बुरा न हो।” उन्होंने कहा, “अगर कोई जवाब नहीं आता है तो मुझे लगता है कि यह नाटो के भविष्य के लिए बहुत बुरा होगा।”

राष्ट्रपति ट्रंप ने रूस के खिलाफ युद्ध में यूक्रेन को अमेरिका से दी गई मदद का जिक्र करते हुए कहा, “हमें यूक्रेन के मामले में उनकी मदद करने की कोई जरूरत नहीं थी।अब हम देखेंगे कि क्या वे हमारी मदद करते हैं। मैं लंबे समय से कहता आ रहा हूं कि हम उनके लिए हमेशा मौजूद रहेंगे। यह पूछे जाने पर कि उन्हें नाटो से किस तरह की मदद चाहिए? राष्ट्रपति ने कहा, “जो भी जरूरी हो। उसमें बारूदी सुरंग नष्ट करने वाले जहाज भी शामिल हो सकते हैं। “

नाटो यूरोपीय और उत्तरी अमेरिकी (NATO is a European and North American) रक्षा गठबंधन है। इसे शांति और स्थिरता को बढ़ावा देने और अपने सदस्य देशों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया है। इसका मकसद किसी ऐसे देश की मदद करना नहीं है, जब कोई सदस्य देश खुद ही युद्ध शुरू कर दे। फ्लोरिडा से एयर फ़ोर्स वन विमान से व्हाइट हाउस लौटते समय ट्रंप ने एक बार फिर दोहराया, “हम हमेशा नाटो के साथ खड़े हैं।” उन्होंने कहा, “यह देखना दिलचस्प होगा कि कौन सा देश एक बहुत ही छोटे से काम में हमारी मदद नहीं करता।

राष्ट्रपति ने ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर (British Prime Minister Keir Starmer) के प्रति अपनी नाराजगी एक बार फिर जहिर की। उनकी नाराजगी का कारण यह था रहा स्टारमर ने ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों को तुरंत अपना समर्थन नहीं दिया था। उन्होंने कहा, “ब्रिटेन को शायद हमारा सबसे महत्वपूर्ण सहयोगी माना जाता है। जब मैंने उनसे मदद मांगी तो वह साथ नहीं आए।”

जापान अभी तटस्थ

इस मसले पर जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची (Japanese Prime Minister Sanae Takaichi) ने सोमवार को कहा कि जापान की अभी होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित करने में मदद के लिए जहाज भेजने की कोई योजना नहीं है। यह बात प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने सोमवार को कही। इससे पहले, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (U.S. President Donald Trump) ने अपने सहयोगी देशों से मदद का अनुरोध किया था। उन्होंने कहा कि ट्रंप ने टोक्यो से सीधा कोई अनुरोध नहीं किया है। बावजूद इसके उनकी सरकार जरूरी कदम उठाने के तरीकों पर विचार कर रही है। उल्लेखनीय है कि ताकाइची और ट्रंप गुरुवार को वाशिंगटन में मिलने वाले हैं।

वर्तमान में नाटो में कुल 32 सदस्य देश हैं। इस सैन्य गठबंधन का सबसे नया सदस्य स्वीडन है। संस्थापक सदस्य बेल्जियम, कनाडा, डेनमार्क, फ्रांस, आइसलैंड, इटली, लक्ज़मबर्ग, नीदरलैंड, नॉर्वे, पुर्तगाल, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका हैं।

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