गोरखपुर:(Vat Savitri) सुहागिन महिलाओं (married woman) ने शुक्रवार यानी ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि तद्नुसार 19 मई को वट सावित्री व्रत रखा। पति की लम्बी उम्र की कामना की और बरगद के वृक्ष को पंखा झला। जीवन में सदैव खुशहाली और सौभाग्य का आशीर्वाद मागा।
वट सावित्री व्रत रखने वाली सुहागिन महिलाओं के दिन की शुरुआत भोर से ही हो गयी। महिलाओं ने सूर्योदय के पहले उठकर स्नान किया और नये वस्त्र धारण करने के साथ श्रृंगार किया। फिर, अपने सास ससुर और घर के बड़ों का आशीर्वाद लेने के बाद वे वट वृक्ष के पास पहुंची।
यहां बैठकर पंच देवता और विष्णु भगवान के आह्वान के साथ ही पूजा पाठ की शुरुआत की। तीन कुश और तिल लेकर ब्रह्मा जी और देवी सावित्री का आह्वान किया और काफ़ी देर तक ‘ॐ’ नमो ब्रह्मणा सह सावित्री इहागच्छ इह तिष्ठ सुप्रतिष्ठिता भव’ मंत्र का जप करती रहीं। इसके बाद जल, अक्षत, सिंदूर, तिल, फूल, माला, पान अर्पित किया और एक फल लेकर वट वृक्ष पर जल अर्पित किया। कच्चा सूत लेकर वट वृक्ष को 07 अथवा 21 बार परिक्रमा किया। वट वृक्ष के नीचे बैठकर पंखा झला।
क्या है महात्म्य
वट सावित्री व्रत सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए रखती है। शुक्रवार यानी 19 मई को वट सावित्री का व्रत रखा गया। इस दिन वट वृक्ष की विधिवत पूजा की गयी। हिंदू पंचांग के अनुसार, हर साल ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि के दिन वट सावित्री व्रत रखने का विधान है। वट सावित्री व्रत रखने से महिलाओं को सौभाग्य की प्राप्ति और पति को लम्बी उम्र मिलती है।


