वाराणसी : (Varanasi) कोविड—19 महामारी के दौर में म्यूकोरमाइकोसिस संक्रमण से बोलने और चबाने की क्षमता खो बैठे मरीज को बीएचयू में फिर से सामान्य जीवन जीने में मदद मिली है। बीएचयू चिकित्सा विज्ञान संस्थान के फैकल्टी ऑफ डेंटल साइंसेज में डॉ. रोमेश सोनी और उनकी टीम ने मरीज की चबाने और बोलने की क्षमता लौटा कर बड़ी सफलता हासिल की है।
डॉ रोमेश सोनी के अनुसार म्यूकोरमाइकोसिस के कारण मरीज के पूरे ऊपरी जबड़े (मैक्सिला) को एक साल पहले सर्जरी के दौरान हटा दिया गया था। इस वजह से मरीज को खाना खाते समय नाक से खाना निकलने, बोलने में परेशानी, ठोस खाना न खा पाने और चेहरे की बनावट खराब होने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा। इन समस्याओं ने मरीज के जीवन को बहुत मुश्किल बना दिया था। डॉ. सोनी और उनकी टीम(डॉ. प्रियांक राय, डॉ. स्टैनज़िन, डॉ. स्निग्धा, डॉ. नचम्मई) ने मरीज की मदद के लिए “क्वाड जाइगोमा इम्प्लांट” तकनीक का इस्तेमाल किया। इस प्रक्रिया में गाल की हड्डियों में चार इम्प्लांट लगाए गए, जिससे ऊपरी जबड़े की हड्डी के बिना भी एक स्थिर आधार बनाया जा सके। इसके बाद, एक खास धातु का फ्रेम बनाया गया, जिसमें मैग्नेट लगाए गए। इन मैग्नेट्स की मदद से कृत्रिम दांत (प्रोस्थेसिस) को आसानी से जोड़ा गया, जिससे इसे मजबूती और स्थिरता मिली।
डॉ सोनी के अनुसार इस उपचार के बाद मरीज ने फिर से आराम से खाना शुरू किया, स्पष्ट बोलने में सक्षम हुआ और उसके चेहरे की सुंदरता भी वापस आई। मरीज ने खुशी जाहिर कर बताया कि “मुझे नहीं लगा था कि मैं फिर से खाना खा पाऊंगा और अपनी जिंदगी सामान्य तरीके से जी पाऊंगा।” फैकल्टी के डीन प्रो. एच. सी. बरनवाल ने कहा कि यह मामला दिखाता है कि उन्नत डेंटल तकनीकों से कोविड—19 से जुड़ी गंभीर समस्याओं को भी हल किया जा सकता है। मरीज की जीवनशैली में आया सुधार हमारे लिए बहुत संतोषजनक है।
कोविड—19 महामारी के दौर में म्यूकोरमाइकोसिस संक्रमण से बोलने और चबाने की क्षमता खो बैठे मरीज को बीएचयू में फिर से सामान्य जीवन जीने में मदद मिली है। बीएचयू चिकित्सा विज्ञान संस्थान के फैकल्टी ऑफ डेंटल साइंसेज में डॉ. रोमेश सोनी और उनकी टीम ने मरीज की चबाने और बोलने की क्षमता लौटा कर बड़ी सफलता हासिल की है।


