उल्हासनगर : भूमि आरक्षण के एक भूखंड के बारे में स्वामित्व विवाद के मामले में एक व्यक्ति को हस्तांतरणीय विकास अधिकार (टीडीआर) के संबंध में आशय पत्र जारी किया गया है। ऐसा आरोप मनपा प्रशासन के पूर्व सचिव एड प्रकाश कुकरेजा ने किया है। यह आरोप निराधार है और केवल आशय पत्र दिया गया है। सरकार के नियमों शर्तों के अनुसार टीडीआर दिया जाएगा। इसलिए टीडीआर नहीं दिया गया है। इसलिए घोटाला होने का सवाल ही नहीं उठता है। ऐसा स्पष्टीकरण मनपा के नगररचनाकार प्रकाश मुले ने दिया है।
प्रकाश मुले द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार उल्हासनगर मनपा के हद में आने वाले प्लॉट क्रमांक 285 यह 842.80 वर्ग मीटर का भूखंड नवीन विकास योजना के अनुसार खेल के मैदान हेतु आरक्षित है। हेमंत केसवानी नाम के व्यक्ति ने प्लॉट अपना बताकर मनपा प्रशासन से टीडीआर की मांग किया था। प्रथमदर्शी व्यवहार व सेटलमेंट आयुक्त द्वारा दिए गए निर्णय के अनुसार भूखंड उन्हीं का है। इस बात को ध्यान में रखते हुए हमने टीडीआर के संबंध में आयुक्त के अनुमोदन के अनुसार उन्हें एक आशय पत्र दिया है। आशय पत्र के नियम व शर्तों के अनुसार केसवानी को अपनी भूमि मनपा प्रशासन को हस्तांतरित करनी होगी। यदि भूखंड पर अतिक्रमण हो, तो उसे तत्काल हटाएं, समतल करें, सुरक्षा दीवार बनानी चाहिए, इसके बाद इस स्थान पर बोर्ड लगा देना चाहिए कि यह भूखंड मनपा प्रशासन का है। इन सभी प्रक्रियाओं के बाद आयुक्त व संबंधित अधिकारियों द्वारा तीन बार सत्यापन के बाद ही टीडीआर जारी किया जाएगा। इसलिए प्रकाश मुले ने सवाल उठाया है कि टीडीआर घोटाला कैसे होगा, क्योंकि अभी तक टीडीआर ही नहीं दिया गया है। सेटलमेंट आयुक्त के फैसले के मुताबिक इसका मालिकाना हक हेमंत केसवानी के पास है। प्रकाश मुले ने अधिवक्ता प्रकाश कुकरेजा को भी सलाह दी है कि अगर आरोप लगाने वाले संतुष्ट नहीं हैं, तो उन्हें हाईकोर्ट में जाना चाहिए। उपरोक्त प्लॉट अपनी मालिकाना है। ऐसा दावा राम काकरानी ने किया है। इस संबंध में काकरानी की ओर से एड प्रकाश कुकरेजा ने मनपा आयुक्त, एसडीओ व नगर सर्वेक्षण कार्यालय को नोटिस जारी किया है। उन्होंने नगर पालिका प्रशासन पर टीडीआर घोटाले का आरोप लगाया है।


