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Ulhasnagar : उल्हास नदी में प्रदूषण का संकट, 5000 लोगों की प्यास बनी समस्या

उल्हासनगर : (Ulhasnagar) कल्याण-मुरबाड राष्ट्रीय महामार्ग के समीप स्थित रायता, वरप, कांबा, म्हारल गांवों से होकर बहने वाली उल्हास नदी, जो कभी 50 लाख लोगों के लिए जीवनदायिनी थी, अब प्रदूषण से जूझ रही है। केमिकल, रसायन और घरेलू गंदे पानी के बहने के कारण यह नदी अब अपने मूल रूप में नहीं रह गई है। नदी में जलकुंभी का जाल फैलने से मछलियां और अन्य जलीय जीव मर रहे हैं, और इसके साथ ही नदी में दुर्गंध फैल रही है। इन गंदे पानी को वाडा, पाडा समेत कई गांवों में बिना फिल्टर किए जलापूर्ति के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे सरकार की “हर घर शुद्ध जल” योजना पर सवाल उठने लगे हैं। पिछले 25 वर्षों से प्रशासन उल्हास नदी के पानी को बिना किसी फिल्टर या ट्रीटमेंट के 5,000 से ज्यादा नागरिकों को दैनिक उपयोग के लिए दे रहा है, जिसके परिणामस्वरूप त्वचारोग, पानी से होने वाली बीमारियां और अन्य शारीरिक समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं।

ग्रामस्थों की गंभीर मांग
ग्रामस्थ और उल्हास नदी बचाओ कृति समिति के कार्यकर्ता निकेश पावशे ने प्रशासन से तत्काल शुद्ध जल की व्यवस्था करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जल्द ही शुद्ध पानी की व्यवस्था नहीं की जाती, तो ग्रामीणों को मजबूरन आंदोलन करना पड़ेगा।

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