
श्मशान भूमि में बिना अनुमति लगी है मूर्ति
उल्हासनगर : (Ulhasnagar) शांतिनगर श्मशान भूमि में स्थापित डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर की प्रतिमा (statue of Dr. Babasaheb Ambedkar, installed within the Shantinagar cremation ground) को लेकर विवाद गहरा गया है। बिना किसी आधिकारिक अनुमति के लगाई गई इस प्रतिमा को स्थानांतरित करने के प्रस्ताव को महापौर अश्विनी निकम (Mayor Ashwini Nikam) द्वारा बिना चर्चा किए खारिज किए जाने से दलित समुदाय और सामाजिक कार्यकर्ताओं में भारी नाराजगी है।
श्मशान भूमि में स्थापना और सुरक्षा का सवाल
उल्हासनगर-3 के शांतिनगर श्मशान भूमि में डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर की एक प्रतिमा स्थापित की गई है। सामाजिक कार्यकर्ता राज असरोंडकर और श्याम गायकवाड़ (Social activists Raj Asrondkar and Shyam Gaikwad) का तर्क है कि श्मशान या कब्रिस्तान जैसी जगहों पर अक्सर नशाखोरों और असामाजिक तत्वों का आना-जाना रहता है। ऐसे में प्रतिमा की गरिमा बनाए रखने के लिए इसे किसी सुरक्षित और उपयुक्त सार्वजनिक स्थान पर ‘सम्मानपूर्वक’ स्थानांतरित किया जाना चाहिए।
- मनपा का ‘बिना अनुमति’ वाला कबूलनामा
उल्हासनगर महानगरपालिका (Ulhasnagar Municipal Corporation) ने लिखित रूप में यह साफ कर दिया है कि यह प्रतिमा नगर निगम द्वारा स्थापित नहीं की गई है और न ही इसके लिए कोई आधिकारिक सरकारी अनुमति ली गई है। इसके बावजूद, प्रतिमा वहां मौजूद है, जो प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़ा करता है।
महापौर का ‘नो-डिस्कशन’ स्टैंड
कल हुई मनपा की आम बैठक में जब इस मुद्दे पर चर्चा की मांग की गई, तो महापौर अश्विनी निकम ने इसे बिना किसी बहस के सीधे खारिज कर दिया। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि इतने संवेदनशील और भावनात्मक मुद्दे पर चर्चा से भागना लोकतांत्रिक नहीं है, जिससे शहर के सामाजिक वातावरण में तनाव बढ़ सकता है।
वंचित बहुजन अघाड़ी ने सदन में उठाया मुद्दा
नगरसेविका सुरेखाताई सोनवाने (Corporator Surekhatai Sonwane) ने इस मुद्दे को सदन में मजबूती से उठाया। उनका मानना है कि महापुरुषों की प्रतिमाओं का अपमान न हो, यह सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। महापौर के फैसले के बाद अब यह मामला राजनीतिक रंग ले चुका है और आने वाले दिनों में आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जा सकती है। ‘कायद्यने वागा’ संगठन और अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि वे प्रतिमा हटाने के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि उसे ‘उचित स्थान’ पर गरिमा के साथ देखने के पक्ष में हैं। दूसरी ओर, इस पूरे विवाद पर महापौर ने अब तक मीडिया या प्रदर्शनकारियों को कोई सीधा जवाब नहीं दिया है, जिससे सस्पेंस और बढ़ गया है।


