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Ulhasnagar : फर्जी दस्तावेज के आधार पर स्कूल पर कब्जा करने वाले चार लोगों पर मामला दर्ज

पुलिस ने किया मुख्य सूत्रधार को गिरफ्तार
उल्हासनगर में नकली दस्तावेज बनाने का चल रहा  खेल

आनंद शुक्ला
उल्हासनगर : उल्हासनगर कैम्प तीन में स्थित गुरु गोविंद हिंदी हाई स्कूल को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर कब्जा करने वाले चार फर्जी ट्रस्टियों के खिलाफ सेंट्रल पुलिस ने मामला दर्ज कर मुख्य सूत्रधार त्रिभुवन नाथ तिवारी को गिरफ्तार कर लिया है। आपको बता दें कि गुरु गोबिंद सिंह हिंदी हाई स्कूल उल्हासनगर के कैंप 3 क्षेत्र में कल्याण-बदलापुर रोड पर वर्ष 1972 से कार्यरत है। यह स्कूल उल्हासनगर टीचर एजुकेशन सोसाइटी के माध्यम से संचालित होता है। इस स्कूल की जमीन संतोष सिंह मूधर के नाम पर है। वर्ष 2016 में इस ट्रस्टी प्रबंधन समिति में तिरथः सिंह मुधर को अध्यक्ष, अमृत कौर झंडू को उपाध्यक्ष, परविंदर कौर को सचिव, जसविंदर कौर को संयुक्त सचिव, त्रिभुवननाथ तिवारी को कोषाध्यक्ष, दर्शन सिंह इंदरलाल को ऑडिटर, गोपाल सिंह को सदस्य के रूप में चुना गया, फिर 2019 में कोषाध्यक्ष का पद संभाल रहे त्रिभुवननाथ तिवारी ने बोगस ठहराव के आधार पर त्रिभुवननाथ तिवारी, नंदिनी त्रिभुवननाथ तिवारी, अंकिता राहुल तिवारी, राहुल त्रिभुवन नाथ तिवारी को अध्यक्ष, सचिव व कोषाध्यक्ष नियुक्त किया। स्कूल ट्रस्ट के सचिव परविंदर कौर का आरोप है कि तिवारी ने अपने नाम से स्कूल स्थापित करने के लिए उप सहायक धर्मदाय आयुक्त के पास फर्जी दस्तावेज जमा कराया। उसी के आधार पर सेंट्रल पुलिस ने त्रिभुवननाथ तिवारी, नंदिनी त्रिभुवननाथ तिवारी, अंकिता राहुल तिवारी तथा राहुल त्रिभुवननाथ तिवारी के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है, चूंकि त्रिभुवन नाथ तिवारी कई वर्षों से उल्हासनगर टीचर एजुकेशन सोसाइटी में कार्यरत हैं,इसलिए वे इस स्कूल की कार्यप्रणाली के बारे में बहुत कुछ जानते हैं। वहीं त्रिभुवन नाथ पर भरोसा होने के कारण उनके काम पर कभी संदेह नहीं किया गया। लेकिन पिछले कुछ महीनों से उनके व्यवहार में आए बदलाव और स्कूल में चल रही चर्चा से यह बात सामने आई कि त्रिभुवननाथ तिवारी ने इस स्कूल को अपने कब्जे में ले लिया है, उप सहायक धर्मदाय आयुक्त कार्यालय में पूछताछ के बाद त्रिभुवन नाथ तिवारी द्वारा विभिन्न दस्तावेजों के आधार पर स्कूल को अपने कब्जे में लेने की बात सामने आने पर परविंदर कौर ने सेंट्रल पुलिस थाने में धोखाधड़ी का आवेदन दिया। हालांकि, तिवारी के संगठन के कुछ सदस्यों द्वारा तिवारी के खिलाफ हलफनामा दायर करने के बाद मामला दर्ज किया गया और त्रिभुवननाथ तिवारी को गिरफ्तार कर लिया गया और कोर्ट ने उन्हें पुलिस हिरासत में भेज दिया है।

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