spot_img

Udaipur: गुरु पूर्णिमा पर लें पर्यावरण सुरक्षा संकल्प

उदयपुर:(Udaipur) महाभारत के रचियता वेद व्यास ने तालाबों, नदियों के किनारों तथा चरागाहों पर अतिक्रमण, पृथ्वी तापमान वृद्धि, जैव विविधता समाप्ति जैसी पर्यावरणीय विभीषिकाओं को महाप्रलय का सूचक बताया हैं।

यह बात गुरु पूर्णिमा-वेद व्यास जयंती की पूर्व संध्या पर रविवार को आयोजित झील संवाद में विद्या भवन पॉलिटेक्निक के प्राचार्य डॉ. अनिल मेहता ने कही। उन्होंने कहा कि मेहता ने आग्रह किया कि गुरु पूर्णिमा के अवसर पर सभी अपने गुरुओं के समक्ष वृक्ष संरक्षण, जलस्रोत संरक्षण तथा प्रदूषण नियंत्रण का संकल्प लें।

प्रलय के संकेतों की विवेचना करते हुए झील विकास प्राधिकरण के पूर्व सदस्य तेज शंकर पालीवाल ने कहा कि छोटे तालाबों की भूमि को खुर्द बुर्द करने से बाढ़ व सूखे जैसी आपदाएं बढ़ेंगी। गांधी मानव कल्याण समिति के निदेशक नंद किशोर शर्मा ने कहा कि झीलों के जल ग्रहण क्षेत्र मे बढ़ते जा रहे कंक्रीट निर्माण झीलों व इंसानों के लिए घातक हैं।

अभिनव संस्थान के निदेशक कुशल रावल ने कहा कि झीलों तालाबों के आसपास तथा भीतर बढ़ती जा रही मानवीय गतिविधियां विनाश लाएगी। झील प्रेमी द्रुपद सिंह व रमेश राजपूत ने कहा कि प्रकृति प्रतिकूल जीवन शैली वर्तमान पर्यावरण संकट का प्रमुख कारण है। संवाद से पूर्व स्वच्छता श्रमदान कर झील किनारे पड़ी गंदगी को हटाया गया।

Ahilyanagar : देश का पहला ‘जाति मुक्त’ गांव घोषित हुआ सौंदला

अहिल्यानगर : (Ahilyanagar) देश में जहां एक ओर जातिगत जनगणना और आरक्षण की राजनीति को लेकर बहस छिड़ी हुई है, वहीं महाराष्ट्र के अहिल्यानगर...

Explore our articles