spot_img

Udaipur: सर्व समाज मातृशक्ति ने की समलैंगिक विवाह वैध घोषित नहीं किये जाने की मांग

उदयपुर:(Udaipur) समलैंगिक विवाह को न्याय पालिका द्वारा वैध घोषित नहीं किये जाने की मांग को लेकर सर्व समाज मातृशक्ति (Sarva Samaj Matrushakti) ने उदयपुर में राष्ट्रपति के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौपा।

सर्व समाज से मातृशक्ति की ओर से गुरुवार शाम को दिए गए ज्ञापन में बताया गया कि भारत आज सामाजिक आर्थिक क्षेत्रों की कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे में समलैंगिक विवाह के अधिकार विषयांतर्गत विषय को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सुनने एवं निर्णित करने की कोई गंभीर आवश्यकता नहीं है।

ज्ञापन में कहा गया कि भारत विभिन्न धर्मों, जातियों, उप जातियों का देश है। इसमें शताब्दियों से केवल जैविक पुरुष एवं जैविक महिला के मध्य विवाह को ही मान्यता दी गई है। सभी धर्मों में केवल विपरीत लिंग के दो व्यक्तियों के विवाह का उल्लेख है। विवाह को दो अलग अलग लैंगिकों के पवित्र मिलन के रूप में मान्यता देते हुए भारत का समाज विकसित हुआ है।

ज्ञापन में कहा गया कि स्वतंत्र भारत को अपनी सांस्कृतिक जड़ों पर पश्चिमी विचारों, दर्शनों एवं प्रथाओं के अधिरोपण का सामना करना पड़ रहा है जो इस राष्ट्र के लिए व्यावहारिक नहीं है। ज्ञापन में उक्त विषय पर सभी हितबद्ध व्यक्तियों, संस्थाओं से परामर्श करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाने तथा यह सुनिश्चित करने का प्रयास किए जाने के साथ ही समलैंगिक विवाह न्यायपालिका द्वारा वैध घोषित नहीं किए जाने की मांग की गई है।

सर्व समाज के प्रतिनिधि मंडल में वंदना उदावत, संगीता वर्डिया, रेखा जैन, मंजू सेन, तारा मोची, वर्षा कुमावत, मंजू शर्मा, शशि अग्रवाल, सरिता भादविया , करुणा माण्डावत, कुसुम बोरदिया, सरला गुप्ता, धरा गुप्ता, कविता जोशी, मिना भारती, कुसुम पंवार, भावना नागदा, बीना वर्डिया, सुषमा कुमावत, रानू भटनागर, रजनी डांगी, नीरजा रोजर्स, रूपम नलवाया, प्रिया खंडेलवाल, शारदा कलाल आदि उपस्थित थीं।

Explore our articles