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Udaipur : ‘पाठयेम संस्कृतं जगति सर्वमानवान’ की संकल्पना पर बढ़ रहा संस्कृत भारती

संस्कृत में प्रस्तुतियों पर अभिभूत हुए अतिथि

उदयपुर : ‘पाठयेम संस्कृतं जगति सर्वमानवान’ की संकल्पना को सर्व प्रमुख मानते हुए संस्कृत भारती देववाणी को जनवाणी बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। गत 42 वर्षों में संस्कृत भारती द्वारा संस्कृत संभाषण शिविरों में कई लोग संस्कृत बोलना सीखे हैं, तो कई में संस्कृत पठन-पाठन की रुचि भी बनी है। संस्कृत ऋषियों द्वारा वैज्ञानिक रीति से विकसित भाषा है।

यह बात संस्कृत भारती चित्तोड़ प्रांत के सहमंत्री डॉ. मधुसूदन शर्मा ने यहां गवरी चौराहा सेक्टर-13 स्थित वनवासी कल्याण परिषद के छात्रावास में चल रहे छह दिवसीय आवासीय संस्कृत भाषाबोधन वर्ग के समापन अवसर पर कही। उन्होंने कहा कि संस्कृत भारती भारत सहित विश्व के 29 देशों में संस्कृत के प्रचार प्रसार का कार्य निरंतर कर रही है।

इस अवसर पर अध्यक्षीय उद्बोधन में जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ के कुलपति प्रो कर्नल एसएस सारंगदेवोत ने कहा कि संस्कृत के प्रति समाज का सकारात्मक रवैया अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में संस्कृत के प्रति विश्व में चाह बढ़ रही है।

उन्होंने अपने उद्बोधन में बताया कि हमारे देश में 179 भाषा व 540 बोलियों का उद्भव संस्कृत से होता है। संस्कृत सम्पूर्ण भारोपीय भाषा परिवार की जननी है। उच्च शिक्षा में संस्कृत के प्रति प्रोत्साहन संवर्धन तथा संरक्षण की दिशा में 3 डीम्ड विश्वविद्यालय, 21 आदर्श संस्कृत वेद विद्यालय, 4 शोध संस्थान, राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान तथा 73 वैदिक पाठशाला 750 संस्कृत महाविद्यालय स्थापित हैं।

उन्होंने कहा कि संस्कृत भाषा के संरक्षण में मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा जहां 1987-88 में संस्कृत के संरक्षण के लिए 73,94000 का बजट था, वहीं 2014-15 में ढाई सौ करोड़ का हो गया तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भी संस्कृत को अत्यधिक महत्व के साथ स्थापित किया गया है।

उन्होंने संस्कृत को भारतीय ज्ञान का अमूल्य कोश बताते हुए संस्कृत के हित में आम समाज युवाओं को प्रेरित करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका में भारत के 6750 ग्रंथ मिले हैं जो संस्कृत के है, और यह भारत के लिए गौरवपूर्ण है।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि पंचायती निरंजनी अखाड़ा सिमर सायरा के श्रीश्री 1008 मनीषानंद महाराज थे। उन्होंने कहा कि संस्कृत वेदों की भाषा के साथ-साथ भारतीय संस्कृति का मूल आधार है।

विशिष्ट अतिथि उदयपुर नगर निगम के उपमहापौर पारस सिंघवी ने संस्कृत भारती द्वारा संस्कृत के उत्थान व उन्नयन में किए जा रहे अथक प्रयासों की प्रशंसा करते हुए संस्कृत भारती की संकल्पना को नमन किया। विशिष्ट अतिथि समाजसेवी उदयपुर सिटीजन सोसायटी के अध्यक्ष क्षितिज कुंभट ने संस्कृत भाषा को सरल रीति से संभाषण कराने तथा आम बोलचाल व्यवहार की भाषा बनाने पर बल दिया।

शिविर के वर्गाधिकारी डॉ. यज्ञ आमेटा, विभाग संयोजक दुष्यंत नागदा, सहसंयोजक नरेंद्र शर्मा, महानगर अध्यक्ष संजय शांडिल्य, महानगर मंत्री डॉ. हिमांशु भट्ट, वर्ग सह संयोजिका रेखा सिसोदिया, वर्ग शिक्षण प्रमुख मानाराम चौधरी, वर्ग संयोजक कुलदीप जोशी, अखिलेश आदि ने अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम में प्रतिभागियों काजल, सैकत दास ने अपने अनुभव भी संस्कृत प्रस्तुत किए। लक्ष्मण और विशाल ने मोबाइल पर संस्कृत वार्तालाप प्रस्तुत किया। संस्कृत लघुनाटिका भी प्रस्तुत की गई। लेखनी पण्ड्या ने काव्यगीत व तनु, यामिनी, राधा ने समूह नृत्य की प्रस्तुति दी। संस्कृत में प्रस्तुतियों को देखकर अतिथि भी अभिभूत हो गए। शिविर में कुल 109 प्रतिभागी शामिल हुए जिनमें 55 छात्राएं थीं। इस बार शिविर में आत्मरक्षा के गुर भी सिखाए गए।

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